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बेघरों को फ्लैट देने के लिए मानकों में ढील का शासन को प्रस्ताव

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रुड़की। बेघरों को फ्लैट बनाकर देने की योजना साकार करने के लिए एचआरडीए एवं नगर निगम ने चयनित भूमि का सर्वे करने के बाद शासन को रास्ते की चौड़ाई के मानकों में ढील दिए जाने का प्रस्ताव भेजा है। जो भूमि चिह्नित की गई है, वहां प्रस्तावित फ्लैट तक जाने का रास्ता सात मीटर है, जबकि मानकों के अनुसार यह नौ मीटर होना चाहिए।
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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऐसे पांच हजार से अधिक लोगों ने आवेदन किया है, जिनके पास न रहने के लिए अपना घर है और न ही जमीन। योजना के तहत ऐसे लोगों को फ्लैट बनाकर दिए जाने हैं। इसके लिए नगर निगम को जमीन मुहैया करानी है, वहीं एचआरडीए को फ्लैट का निर्माण करना है। नगर निगम ने इसके लिए सालियर स्थित भूमि को प्रस्तावित किया है। इसका पिछले दिनों नगर निगम और एचआरडीए ने संयुक्त सर्वे किया। इस दौरान पाया गया कि क्षेत्रफल के लिहाज से भूमि उपयुक्त है, लेकिन प्रस्तावित फ्लैट तक जाने के लिए अप्रोच रोड सात मीटर की है, जबकि मानकों के अनुसार यह नौ मीटर होनी चाहिए। ऐसे में दोनों विभागों की ओर से रास्ते का अड़ंगा हटाने के लिए शासन को नियमों में ढील दिए जाने का प्रस्ताव भेजा है। नगर आयुक्त नूपुर वर्मा ने बताया कि निगम के पास अन्य भूमि नहीं है। रास्ते की चौड़ाई वहां तक पहुंचने के लिए काफी है, लेकिन मानकों के अनुसार दो मीटर कम है। ऐसे में नियमों के शिथिलीकरण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
तीन विभागों की हर झंडी के बाद तैयार होगी डीपीआर
नगर निगम की सालियर स्थित भूमि से कुछ दूरी पर सोलानी नदी बहती है। इसके अलावा यहां पर नगर निगम का कूड़ा भी एकत्र किया जाता है। वहीं दूसरी ओर, जमीन के आसपास से हाईटेंशन लाइन भी गुजर रही है। ऐसे में संबंधित विभागों की ओर से सकारात्मक रिपोर्ट मिलने के बाद डीपीआर बनाने का काम शुरू हो सकेगा। एचआरडीए के सहायक अभियंता डीएस रावत ने बताया कि चयनित भूमि से कुछ दूरी पर सोलानी नदी है। हाईकोर्ट के भी आदेश हैं कि नदी से दो सौ मीटर तक कोई निर्माण नहीं हो सकता। ऐसे में दूरी एवं अन्य मानकों के लिए सिंचाई विभाग से रिपोर्ट ली जाएगी। इसके अलावा यहां कूड़ा डंप होता है, जिसके बाद नगर निगम ने बताया है इसे जल्द ही निस्तारित किया जाएगा। इस बाबत प्रदूषण बोर्ड से भी रिपोर्ट मांगी जा रही है।
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