अमर उजाला ब्यूरो
लक्सर। दाबकी गांव के दिव्यांग सुमित कुमार ने हिम्मत व इच्छा शक्ति के बल पर ब्लड कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी के बावजूद आयुष चिकित्सा अधिकारी की भर्ती परीक्षा में 13 वीं रैंक हासिल करने में कामयाबी पाई। पंतजलि योग के आयुर्विज्ञान संस्थान से बीएएमएस में गोल्ड मेडलिस्ट डा. सुमित तीन साल पतंजलि में बतौर चिकित्सक नौकरी की।
लक्सर विकासखंड के दाबकी गांव निवासी राजसिंह के बेटे सुमित को जन्म लेने के बाद ही मुसीबत ने घेरना शुरू कर दिया। जन्म के कुछ दिनों बाद ही सुमित पोलियो का शिकार हो गया। काफी इलाज कराने के बाद भी वह ठीक नहीं हो पाया। बावजूद इसके उसने हार नहीं मानी। उसने हाईस्कूल व इंटर प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया। लेकिन मुसीबतों ने उसका यहां भी पीछा नहीं छोड़ा। कुछ वर्ष पहले सुमित को बुखार होने पर जब उसका चेकअप कराया गया तो डाक्टरों ने उसे ब्लड कैंसर बता दिया। सुमित का दिल्ली, मेरठ के कई बड़े अस्पतालों में इलाज कराने पर भी कोई राहत नहीं मिली। बावजूद इसके सुमित ने बीमारी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। वह अपने परिजनों के साथ इलाज कराने के लिए पुरकाजी में गंगनहर के किनारे स्थित आचार्य योगी कर्मवीर महाराज के आश्रम में गया। सुमित के चाचा एवं पूर्व प्रधान प्रमोद कुमार का दावा है कि आश्रम में हुए इलाज के बाद सुमित का कैंसर पूरी तरह ठीक हो चुका है। उन्होंने बताया कि लोनावाना बांबे स्थित आश्रम में एक माह तक योगी कर्मवीर ने गोमूत्र के साथ दवाइयां दी थी। सुमित दवाइयों के साथ सुबह- शाम दो-दो घंटे योग करता था। सुमित में कैंसर की प्रथम स्टेज थी। आश्रम में उपचार के बाद जो टेस्ट कराए उसमें कैंसर रिपोर्ट नेगेटिव आई है। सुमित ने पंतजलि योग के आयुर्विज्ञान संस्थान में रिसर्च सेंटर में बीएएमएस में टॉप कर गोल्ड मेडल भी प्राप्त किया है और तीन साल से सेंटर में ही चिकित्सक की नौकरी कर रहा है। अब सुमित ने उत्तराखंड सरकार की ओर से आयोजित आयुष चिकित्सकों की भर्ती में 13वी रैंक प्राप्त की है। सुमित ने बताया कि वह अपनी सफलता का श्रेय रिश्तेदारों व परिजनों के अलावा अपने चाचा प्रमोद कुमार को देते हैं।