रुड़की। आने वाले दिनों में उत्तर रेलवे के पुलों की सेहत पर एक विशेष प्रकार की डिवाइस नजर रखेगी। पुल के क्षतिग्रस्त होने या खतरा होने पर डिवाइस कंट्रोल को एसएमएस के जरिए सूचना देगी। इससे समय रहते रेल प्रबंधन तत्काल कार्रवाई करते हुए हादसे पर अंकुश लगा सकेगा। इस विशेष डिवाइस का प्रयोग डब्लूसीआर (पश्चिम मध्य रेलवे) ने अपने रेलवे पुलों पर करना शुरू कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों देश के सबसे बड़े रेलवे जोन एनआर (उत्तर रेलवे) के पुलों में यह डिवाइस लगाई जाएगी।
देश में हजारों की संख्या मेें रेलवे पुल नदियों के ऊपर बने हैं। आमतौर पर बारिश और बाढ़ के कारण रेलवे पुल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। बीते साल बाढ़ के कारण डब्लूसीआर (पश्चिम मध्य रेलवे) में एक रेलवे पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी। घटना के बाद से जागे अधिकारियों ने नदियों के रेलवे पुलों में डिवाइस लगाने का काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक रेलवे पुल या पुलिया को नुकसान पहुंचने पर यह डिवाइस एसएमएस द्वारा इंजीनियरिंग विभाग, संबंधित अधिकारी और कंट्रोल को सूचित करेगी। इससे समय रहते ट्रेनों के संचालन को रोककर किसी अप्रिय घटना पर अंकुश लगाया जा सकेगा। प्रदेश में कई रेलवे पुल नदियों के ऊपर बनें हैं। हर साल आने वाली बाढ़ के कारण इन पुलों पर खतरा मंडराता रहता है। बीते साल कोटद्वार में बाढ़ के चलते एक रेलवे पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। रेल यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए अब उत्तर रेलवे अपने पुलों में डिवाइस लगाने की तैयारी में है। प्रारम्भ में महत्वपूर्ण रेलवे पुलों को चिहिंत कर डिवाइव लगाई जाएगी। रुड़की का गंगनहर प्रदेश के प्रमुख पुलों में से एक है।
अधिकारियों के मुताबिक नदी का जलस्तर जब खतरे के निशान के ऊपर हो जाता है। तब पुल के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। यह विशेष डिवाइस रेलवे पुल के डेंजर लेवल पर लगाई जाती है। जैसे ही नदी का पानी डेंजर लेवल पर आता है। डिवाइस सक्रिय हो जाती है। साथ ही एसएमएस के जरिए सूचना देने लगती है।
पुलों में डिवाइस लगाए जाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। खतरा होने पर डिवाइस सूचना भेजती हैक
आईएस सिद्दकी, पीआरओ भोपाल, डब्लूसीआर
जल्द यह विशेष डिवाइस उत्तर रेलवे के पुलों में लगाई जाएगी। इससे रेल हादसों पर अंकुश लगेगा।
-- नितिन चौधरी, सीपीआरओ, उत्तर रेलवे