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एक तरफ जश्न तो दूसरी तरफ विरोध की चिंगारी

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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की। पूर्व विधायक सुरेश चंद जैन की दो साल बाद घर वापसी से शहर की राजनीति में उबाल आ गया। एक तरफ देहरादून में ज्वाइनिंग लेने के बाद झबरेड़ा विधायक के समर्थकों ने उनका शिवपुरम में जोरदार स्वागत किया तो वहीं दूसरी तरफ शहर विधायक प्रदीप बत्रा ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि अब जबकि लोकसभा चुनाव में कुछ ही दिन शेष रह गए हैं, ऐसे में संगठन के किसी भी पदाधिकारी को विश्वास में लिए बिना देहरादून में पूर्व विधायक की ज्वाइनिंग गलत फैसला है। इस दौरान उन्होंने पूर्व विधायक से जुड़े कॉलेज में करोड़ों की छात्रवृत्ति घोटाले पर हुई कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि इससे पार्टी पर बुरा असर पड़ेगा।
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पूर्व विधायक सुरेश चंद जैन ने शनिवार को अचानक देरहादून में मुख्यमंत्री के सामने भाजपा का दामन थामा तो सभी को चौंका दिया। इसी के साथ राजनीतिक पारा भी चढ़ गया। उनकी ज्वाइनिंग के कुछ ही घंटों बाद शहर विधायक प्रदीप बत्रा ने गंगनहर किनारा स्थित कैंप कार्यालय पर बैठक की। इसमें भाजपा के मंडल अध्यक्षों समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान विधायक प्रदीप बत्रा ने जैन की वापसी का विरोध करते हुए कहा कि जिला और स्थानीय स्तर पर संगठन के पदाधिकारियों को जानकारी दिए बिना ही जैन को देहरादून में पार्टी ज्वाइन कराने का निर्णय गलत है। यही नहीं भाजपा विधायक ने कहा कि सुरेश चंद जैन से जुड़े इंजीनियरिंग कॉलेज में हाल ही में करोड़ों की छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा हुआ। इसमें उनके भतीजे की गिरफ्तारी भी हुई। ऐसे में जीरो टोलरेंस की सरकार के लिए पूर्व विधायक को बिना संगठन को विश्वास में लिए ज्वाइन कराने का निर्णय उचित नहीं ठहराया जा सकता। इस दौरान भाजपा मंडल अध्यक्ष सुनील साहनी, अरविंद गौतम, अभिषेक चंद्रा, प्रवीण सिंधू, राजन गोयल, राहुल भट्ट, सागर गोयल व अनुज शर्मा आदि मौजूद रहे। वहीं दूसरी ओर, शिवपुरम में विधायक देशराज कर्णवाल समर्थकों की ओर से रुड़की पहुंचने पर पूर्व विधायक का फूल मालाओं से स्वागत किया गया।
हाशिये पर गए सुरेश जैन को भाजपा से मिली संजीवनी
रुड़की। भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश चंद जैन कांग्रेस के टिकट पर रुड़की विधानसभा के चुनाव में मिली हार के बाद से राजनीति के हाशिये पर थे। जैन की चुनाव में हार के बाद से राजनीतिज्ञ उनके राजनीतिक करिअर को खत्म मानकर चल रहे थे। खुद जैन भी कांग्रेस के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुए। ऐसे में भाजपा ने उनकी वापसी कराकर उन्हें राजनीतिक संजीवनी प्रदान की है।
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भाजपा के दो बार विधायक रहे सुरेश चंद जैन ने विगत विधानसभा चुनाव में भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव में जैन ने तीसरी बार भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन वे कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव में उतरे और प्रदीप बत्रा से कड़े मुकाबले में हार गए। इसके बाद से ही सुरेश चंद जैन की राजनीति पर ग्रहण शुरू हो गया। विगत विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर से खुद को मजबूत करने की कोशिश की और भाजपा के प्रबल दावेदार के रूप में उभरे, लेकिन इसी बीच हरीश रावत सरकार में हुई उठा पठक के बाद कांग्रेस विधायक प्रदीप बत्रा ने बगावत भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद भाजपा ने सुरेश चंद जैन का टिकट काटकर प्रदीप बत्रा को प्रत्याशी बनाया। उठा पठक का यह दौर यही नहीं थमा, इसके बाद टिकट नहीं मिलने से नाराज सुरेश जैन ने ऐन मौके पर कांग्रेस ज्वाइन की और कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में विधानसभा चुनाव में उतरे। इस बार भी उन्हें विधायक प्रदीप बत्रा के सामने करारी शिकस्त मिली। इसके बाद से जैन सक्रिय राजनीति से दूर होते चले गए। शनिवार को उन्होंने अचानक घर वापसी की। अब देखना यह होगा कि क्या घर वापसी उनके राजनीतिक करिअर को फिर से नई ऊंचाई प्रदान करेगी।
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