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न लंढौरा कभी रियासत थी और न ही प्रणव राजा हैं : चौधरी कुलवीर

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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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भाजपा के दो विधायकों कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और देशराज कर्णवाल के बीच जारी विवाद के बीच अब पार्टी के तीसरे नेता ने भी एंट्री मारी है। चैंपियन के शब्दों से आहत होकर गुर्जर बिरादरी के बड़े नेता माने जाने वाले भाजपा के चौधरी कुलवीर सिंह ने सोमवार को उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि चैंपियन जिस लंढौरा रियासत से जोड़कर खुद को राजा बताते हैं, दरअसल वह कभी रियासत थी ही नहीं। देश की 596 रियासतों में लंढौरा का कहीं नाम नहीं है। उन्होंने कहा कि चैंपियन अपने को बड़ा जमींदार तो बता सकते हैं, लेकिन राजा नहीं। क्योंकि, झबरेड़ा और लंढौरा बड़े जमींदारी क्षेत्र थे न कि रियासत। इस दौरान उन्होंने प्रणव पर कई आरोप लगाते हुए यहां तक कह डाला कि उनके पूर्वज गोद लिए हुए थे और इसलिए चैंपियन के डीएनए में अंतर है।
चौधरी कुलवीर सिंह ने सोमवार को दिल्ली-हरिद्वार रोड स्थित एक होटल में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि चैंपियन हीन भावना से ग्रसित हैं और मुझे खतरा मानते हुए उकसाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सिर से पानी उतरने लगा तो अपना पक्ष रखने उन्हें सामने आना पड़ा। चौधरी कुलवीर सिंह ने कहा कि भले ही वे विधायकी के पांच चुनाव हार गए हों, लेकिन ये सभी चुनाव आंधी के विपरीत लड़े गए थे। उन्होंने कहा कि वे चैंपियन के खादर क्षेत्र से चुनाव जीतकर आए थे, लेकिन लंढौरा क्षेत्र में आकर हार गए। कुलवीर ने आरोप लगाया कि एक चुनाव में उनके 5500 वोट रद्द कराए गए थे और सत्तारूढ़ दल ने उन्हें जबरन 900 वोट से हरवाया था। उन्होंने कहा कि चैंपियन में ताकत थी तो वे पिछला चुनाव भी कांग्रेस में ही रहकर लड़ते। उन्होंने भाजपा पकड़ी और लहर में जीत गए।
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उन्होंने विधायक चैंपियन के खुद को राजा बताने पर भी ऐतराज जताया और कहा कि लंढौरा पहले झबरेड़ा जमींदारी क्षेत्र में था। झबरेड़ा के 400 साल बाद लंढौरा का इतिहास शुरू हुआ। इसलिए अगर चैंपियन राजा हैं तो उससे पहले हम भी राजा कहलाने के हकदार हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि भारत में 596 रियासतें थीं, जिनमें झबरेड़ा और लंढौरा का कहीं कोई जिक्र नहीं है। इससे साफ होता है कि कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं। उन्होंने चैंपियन पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके अंदर जो अहंकार की भावना है, वह उनके डीएनए के कारण है। उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि लंढौरा जमींदारी का वंश खत्म होने पर रानी ने उत्तराधिकारी मांगा था, लेकिन झबरेड़ा के राज परिवार ने जब इससे मना कर दिया तो रामपुर झंझेड़ा क्षेत्र के एक साधारण परिवार से उत्तराधिकारी गोद लिया गया था। इसलिए चैंपियन के डीएनए में अंतर आ गया, जो उनकी कार्यशैली में साफ नजर आता है।
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कुलवीर बोले- यह कहा था चैंपियन ने
चौधरी कुलवीर सिंह ने कहा कि ‘खानपुर विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने मुझे एक ऐसी वीरान मजार बताया था, जिसे जानते तो सब हैं, लेकिन वहां जाता कोई नहीं।’
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