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नरेंद्रनगर में सुबोध की जीत का मिथक रहा बरकरार

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16 मुनिकीरेती,तपोवन में विजय जलूस निकालते भाजपा प्रत्याशी सुबोध उनियाल। - फोटो : RISHIKESH
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विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिले जबरदस्त समर्थन के साथ उत्तराखंड में किसी सियासी दल की दूसरी बार सरकार न बनाने का मिथक टूट गया है। वहीं नरेंद्रनगर सीट पर सुबोध उनियाल की जीत का मिथक अब भी बरकरार है। सुबोध कांग्रेस के टिकट पर तीन और भाजपा के टिकट पर दो बार चुनाव लड़े हैं। सुबोध ने जिस भी राजनीतिक दल से चुनाव जीता, प्रदेश में उसकी ही सरकार बनी है।
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नरेंद्रनगर सीट पर सुबोध उनियाल के साथ जीत का एक मिथक जुड़ गया है। सुबोध उनियाल अपने राजनीतिक दल के लिए भाग्यशाली विधायक रहे हैं। सुबोध ने राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में पहली बार नरेंद्रनगर सीट से कांग्रेस के टिकट में चुनाव लड़ा था। सुबोध इस चुनाव को एक हजार 531 वोटों से जीते थे। तब प्रदेश में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी थी। वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव में सुबोध उनियाल को उत्तराखंड क्रांति दल के प्रत्याशी ओम गोपाल रावत ने महज चार वोटों के मामूली अंतर से चुनाव में मात दी थी। इसके बाद सत्ता भाजपा के हाथ में चली गई। भुवन चंद्र खंडूड़ी को प्रदेश की कमान सौंपी गई। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सुबोध ने 401 वोटों से जीत हासिल की। इसके बाद कांग्रेस ने एक बार फिर सत्ता में वापसी की। पहले विजय बहुगुणा और फिर हरीश रावत मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस सरकार में सुबोध को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वर्ष 2017 में कांग्रेस से बगावत कर सुबोध उनियान भाजपा के टिकट पर नरेंद्रनगर सीट से चुनाव लड़े। इस बार भी सुबोध उनियाल का मुकाबला निर्दलीय प्रत्याशी ओम गोपाल रावत के साथ था। सुबोध चार हजार 972 वोटों से ओम गोपाल को हराकर जीते और भाजपा के लिए भाग्यशाली विधायक साबित हुए। भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ प्रदेश में सरकार बनाई। भाजपा सरकार में सुबोध को कैबिनेट मंत्री के पद से नवाजा गया। वर्ष 2022 के चुनाव में मिथक को एक बार फिर से चुनाव कसौटी पर खरा उतरना था। इस बार भी सुबोध एक हजार 798 वोटों के अंतर से जीते और भाजपा ने एक बड़े मिथक को तोड़ सत्ता में लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की। सुबोध की जीत के साथ जुड़ा सत्ता का मिथक एक बार फिर क्षेत्र में चर्चा में है। संवाद
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