करीब 20 साल से अधिक समय हो गया है, लेकिन घंटाघर की घंटी नहीं बजी। गोपाल कुटी की बिल्डिंग पर बने घंटाघर के जीर्णोद्धार को लेकर नगर निगम की ओर से कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। आज ऋषिकेश की शान घंटाघर बदहाल है।
1928 में देहरादून रोड पर गोपाल सिंह की स्मृति में गोपाल कुटी की स्थापना की गई। इस भवन के मध्य में घंटाघर का निर्माण किया गया था। सामाजिक कार्यकर्ता इंद्रेश बड़थ्वाल का कहना है कि 90 के दशक के पूर्वार्द्ध में घंटाघर की घंटी बजनी बंद हो गई थी। इसके बाद तत्कालीन नगर पालिका प्रशासन ने बाहर से घंटाघर बनाने वाले विशेषज्ञ बुलाए। इसकी मरम्मत कराई गई, लेकिन मरम्मत के चंद दिनों बाद फिर घंटाघर की सुइयों का सरकना बंद हो गया। नगर निगम की स्थापना के बाद स्थानीय निवासियों को उम्मीद थी कि निगम प्रशासन घंटाघर का जीर्णोद्धार कर इस पर डिजिटल घड़ियां लगाएगा, लेकिन निगम प्रशासन ने भी इस तरफ ध्यान नहीं दिया। इंद्रेश बड़थ्वाल ने बताया कि वह घंटाघर की मरम्मत करने के लिए निगम प्रशासन को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन निगम प्रशासन सुनने को तैयार नहीं है।
गोपाल कुटी के जीर्णोद्धार के लिए पिछले साल बोर्ड बैठक में प्रस्ताव आया था। इसमें यह तय हुआ था कि गोपाल कुटी को तोड़कर पीपीपी मोड बनाने को लेकर सहमति बनी थी। उसके बाद इस पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। चुनाव परिणाम आने के बाद प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
- विनोद कुमार जोशी, अधिशासी अभियंता नगर निगम ऋषिकेश