जयराम आश्रम महाविद्यालय में श्रावणी पूर्णिमा पर 40 नए ऋषि कुमारों सहित 60 छात्रों का उपनयन (जनेऊ) संस्कार कराया गया। त्रिवेणी घाट पर सभी ऋषि कुमारों को गंगा स्नान कराया गया।
जयराम आश्रम महाविद्यालय के संचालक ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि श्रावणी पर्व समस्त ब्राह्मणों का एक मात्र त्योहार है। इस दिन यज्ञोपवीत संस्कार किया जाता है। वर्ष भर के लिए यज्ञोपवीत सूत्रों का शास्त्रोक्त विधान से पूजन होता है। वर्षभर में सूतक पातक के कारण जब यज्ञोपवीत बदलते हैं, तो इस स्थिति में नया यज्ञोपवीत किया जाता है। इसलिए यज्ञोपवीत धारी हर ब्राह्मण आज श्रावणी के दिन कम से कम 21 यज्ञोपवीत सूत्रों का शुद्धिकरण कर पूजास्थल पर रख लेते हैं। श्रावणी पर्व व रक्षाबंधन पर्व हमेशा श्रावण मास के अंतिम दिन ही मनाए जाते हैं।
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हवन कर मनाया श्रावणी उपाकर्म
वैदिक ब्राह्मण महासभा (पंजी) की ओर से ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी माधवाश्रम महाराज के शिष्य केशव स्वरूप ब्रह्मचारी की अध्यक्षता में श्रावणी उपाकर्म व संस्कृत दिवस धूमधाम से मनाया गया। कार्यकर्ताओं ने त्रिवेणी घाट पर गंगा स्नान आदि के बाद गणेश पूजन, हवन आदि किया गया। अध्यक्ष गंगाराम व्यास ने कहा कि श्रावणी पर्व हमारी सनातन संस्कृति का मूल आधार है। पूर्व काल से आज के दिन ही गुरुकुलों में अध्ययन अध्यापन शुरू होता था, इस कारण इस पर्व को संस्कृत दिवस भी कहा जाता है। इस मौके पर शिवेंद्र ब्रह्मचारी, महेश्वरानंद महाराज, स्वामी ओमकारानंद, मणिराम पैन्यूली, डॉ. जनार्दन कैरवान, डॉ. सुनील थपलियाल, जितेंद्र भट्ट मौजूद रहे।
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बटुकों ने किया सामूहिक गणपति पूजन
मुनिकीरेती स्थित दर्शन महाविद्यालय में भी उपनयन यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न हुआ। आचार्य आशीष जुयाल, आचार्य शांति प्रसाद मैठानी ने बटुकों से सामूहिक गणपति पूजन पाठ कराया। विद्यालय अध्यक्ष वंशीधर पोखरियाल ने कहा कि बटुक को ब्रह्मचर्य आश्रम में प्रवेश एवं वेदाध्ययन के लिए गुरु के पास ले जाने को ही उपनयन कहा जाता है। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष रोशन रतूड़ी, उत्तराखंड मुक्त विवि के कुलपति प्रो. ओमप्रकाश नेगी, संजय शास्त्री, मदनमोहन शर्मा, रवि शास्त्री, दुर्गा नौटियाल, सत्येश्वर डिमरी, कमल डिमरी, सुशील नौटियाल, मुकेश बहुगुणा, सीमा मैठाणी, रामप्रसाद सेमवाल, अनूप सिंह रावत, पूर्णानन्द सिलस्वाल, प्यारे लाल तिवारी, गोपी सिलस्वाल शामिल रहे।