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सात साल बाद भी नहीं बना हेंवल नदी किनारे सुरक्षा तटबंध

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शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण हेंवलघाटी पर अभी तक नहीं हो सका सुरक्षा तटबंध का निर्माण। - फोटो : RISHIKESH
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ऋषिकेश। दैवीय आपदा के सात साल बीत जाने के बाद भी हेंवल नदी किनारे सुरक्षा तटबंध का निर्माण नहीं हुआ है। तटबंध न बनने से मानसून सीजन में नदी तटों पर रह रहे लोगों के घरों में बारिश का पानी घुस रहा है। आपदा के खतरे से आशंकित लोग सहमे हुए हैं। सुरक्षा तटबंद नहीं होने से जगह-जगह नदी तटों पर भू कटाव और भू धंसाव हो रहा है।
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यमकेश्वर ब्लॉक अंतर्गत वर्ष 2014 में हेंवलघाटी में दैवीय आपदा आई थी। दैवीय आपदा से हेंवलनदी ने रौद्र रूप धारण कर दिया था। इसके चलते रत्तापानी, फूलचट्टी, घट्टूगाड़, मोहनचट्टी, बैरागढ़, जोग्याणा आदि जगहों पर भूस्खलन और भू-कटाव हो गया था। हेंवल नदी के तटबंध टूटने से नदी के तेज प्रवाह में ग्रामीणों की कई हेक्टेयर कृषि भूमि बह गई थी। कई ग्रामीणों की गौशालाएं जमींदोज हो गई थी।
सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा, दिनेश रावत, कलम सिंह राणा, मुकेश चौहान, बीरबल सिंह राणा, रविंद्र सिंह रावत ने बताया कि दैवीय आपदा को बीते हुए करीब सात साल बीत गए हैं। सिंचाई विभाग दुगड्डा डिवीजन की ओर से अभी तक यहां सुरक्षा तटबंध नहीं बनाए गए हैं। मानसून सीजन में बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस जाता है। यह मानसून सीजन जैसे तैसे बीत गया है। इस समय बरसात भी बीत गया है। सिंचाई विभाग को अब क्षेत्र में सुरक्षा तटबंध का कार्य शुरू कर देना चाहिए। यदि अब भी शासन-प्रशासन नहीं चेता तो आगामी मानसून सीजन इससे भी भयावह होगा। शासन-प्रशासन को स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कई बार इस बारे में लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। आज तक किसी ने इसकी सुध नहीं ली है।
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मामला बजट पर अड़ा हुआ है। विभाग के पास बजट उपलब्ध नहीं है। इसके लिए शासन-प्रशासन से कई बार पत्राचार किया जा चुका है। बजट स्वीकृत होते ही आगे का कार्य किया जाएगा।
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-शिव प्रसाद जगूड़ी, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग दुगड्डा डिवीजन
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