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जीपीएस ट्रेकिंग डिवाइस से होगी राफ्ट की निगरानी

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ऋषिकेश। राफ्टिंग के दौरान पर्यटकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए टिहरी पर्यटन विभाग जीपीएस तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। पर्यटन विभाग कौड़ियाला से ऋषिकेश तक संचालित होने वाली सभी राफ्टों पर जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाने की तैयारी कर रहा है। एक एप के माध्यम से राफ्ट की लोकेशन और संचालन के समय की निगरानी की जाएगी। वहीं मानकों के उल्लंघन पर संबंधित राफ्ट संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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वीकेंड पर करीब 50 हजार से अधिक पर्यटक राफ्टिंग के लिए योगनगरी ऋषिकेश पहुंचते हैं। यहां कौड़ियाला, मरीन ड्राइव, शिवपुरी, ब्रह्मपुरी और क्लब हाउस ट्रैक पर राफ्टिंग की जाती है। रोजाना करीब 600 राफ्टें इन राफ्टिंग प्वाइंट से गंगा में उतारी जाती हैं। कई बार पर्यटकों की संख्या ज्यादा होने पर राफ्टिंग संचालक और गाइड मानकों का उल्लंघन करते हैं। सूर्यास्त के बाद गंगा में राफ्टिंग प्रतिबंधित होती है, लेकिन कई राफ्टिंग संचालक मानकों का उल्लंघन कर देर शाम तक राफ्टिंग करवाकर पर्यटकों की जान को जोखिम में डालते हैं। रात को राफ्ट पलटने की स्थिति में पर्यटक के डूबने की आशंका बनी रहती है। जिला साहसिक खेल अधिकारी टिहरी गढ़वाल खुशाल सिंह ने बताया कि मानकों के उल्लंघन को लेकर विभाग निगरानी व्यवस्था को बढ़ाने जा रहा है। पर्यटन विभाग राफ्ट में जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाने की तैयारी कर रहा है। जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस से राफ्ट की लोकेशन और समय को ट्रैक किया जा सकेगा। राफ्ट को एक एप के माध्यम से मॉनीटर किया जाएगा। ट्रैकिंग डिवाइस से सूरज ढलने के बाद राफ्ट के संचालन पर पूरी तरह से रोक लग पाएगी। उन्होंने बताया कि चारधाम यात्रा के बाद ट्रैकिंग डिवाइस का ट्रायल किया जाएगा।
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मानसून काल में होगा प्रशिक्षण
पर्यटन विभाग राफ्टिंग गाइड के प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रहा है। हर साल मानसून सीजन में राफ्टिंग गाइडों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला साहसिक खेल अधिकारी खुशाल सिंह ने बताया कि सुरक्षित राफ्टिंग के लिए गाइड का प्रशिक्षित होना बहुत जरूरी है। इस साल 30 जून के बाद प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
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क्या आ सकती है दिक्कत
कौडियाला और ऋषिकेश के बीच कई जगह नेटवर्क की समस्या है। यहां मोबाइल नेटवर्क भी काम नहीं करते हैं। नेटवर्क की समस्या से एप का जीपीएस सिस्टम से संपर्क टूट सकता है। जिला साहसिक खेल अधिकारी खुशाल सिंह ने बताया कि इस तकनीकी समस्या के निराकरण पर भी काम किया जा रहा है।
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