पं. ललित मोहन शर्मा श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर में राज्य की द्वितीय राजभाषा संस्कृत की उपेक्षा हो रही है। यहां स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं की जिम्मेदारी मात्र एक शिक्षिका पर है। स्नातक और परास्नातक स्तर पर 94 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। विभाग में शिक्षकों की कमी से संस्कृत में छात्र-छात्राओं की संख्या लगातार घट रही है।
पं. ललित मोहन शर्मा श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर के स्नातक प्रथम वर्ष में संस्कृत में 50, द्वितीय वर्ष में 30 और तृतीय वर्ष में मात्र 10 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। वर्ष 2023-24 में विवि परिसर में स्नातकोत्तर स्तर पर भी संस्कृत शुरू हो गई है। इसमें द्वितीय वर्ष में तीन और प्रथम वर्ष में मात्र एक ही प्रवेश हो पाया है। वर्ष 2019 में पं. ललित मोहन शर्मा महाविद्यालय को श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय कैंपस बनाया गया था। कैंपस बनते ही यूजीसी मानकों के तहत कैंपस में शिक्षकों के पदों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है। करीब पांच वर्ष का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक विवि परिसर में संस्कृत के लिए मात्र ही एक शिक्षक का पद सृजित है। संस्कृत को उत्तराखंड राज्य में द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। लेकिन, प्रदेश के विवि में ही द्वितीय राजभाषा की उपेक्षा हो रही है। विवि परिसर में शिक्षकों की कमी से अब कोई भी छात्र-छात्राएं संस्कृति में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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Iमहाविद्यालय के दौरान यहां केवल संस्कृत के लिए एक ही शिक्षक का पद सृजित था। यूजीसी मानकों के तहत अब विवि परिसर में शिक्षकों के पदों में बढ़ोतरी होगी। इसके लिए विवि स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही समस्या का समाधान होगा।
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Iप्रो. महावीर सिंह रावत, निदेशक, विवि परिसरI