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स्वामी दयानंद ने दुनिया को दी भारतीय दर्शन का तालीम

Tue, 26 Jan 2016 02:07 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ऋषिकेश
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भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान से नवाजे गए तीर्थनगरी के स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदांत, उपनिषद और भारतीय दर्शन शास्त्र, गीता उपदेश आदि के प्रचार प्रसार के लिए भारत में चार संस्थाओं की स्थापना की है। उनके द्वारा अमेरिका में स्थापित गुरुकुलम में भी वेदांत की शिक्षा दी जा रही है।
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इनमें तीर्थनगरी स्थित स्वामी दयानंद आश्रम प्रमुख हैै। उक्त केंद्रों के जरिये स्वामी दयानंद से लाखों लोग वेद-वेदांत की शिक्षा दीक्षा ले चुुके हैं। स्वामी दयानंद के दो सौ से अधिक शिष्य भारत समेत दुनियाभर में भारतीय दर्शन का प्रचार प्रसार में जुटे हैं।

तीर्थनगरी के मुनिकीरेती शीशमझाड़ी स्थित स्वामी दयानंद आश्रम के महाप्रबंधक गुणानंद रयाल ने बताया कि ऋषिकेश के अलावा देश में वेद-वेदांत की अन्य संस्थाओं में आर्ष विद्या गुरुकुलम कोयंबटूर तमिलनाडु, आर्ष विद्यालय सेंटर नागपुर और आर्ष विद्या अंबोली, गोवा महाराष्ट्र प्रमुख रूप से शामिल हैं।
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उन्होंने बताया कि संत द्वारा अमेरिका के सैलेस वर्ग के न्यू जर्सी के समीप स्थित पेंसलवेनिया स्टेट में आर्ष विद्या गुरुकुलम की स्थापना की गई है। स्वामी दयानंद सरस्वती के सन्यासी शिष्यों की संख्या करीब ढाई सौ है। जो भारत समेत दुनिया के देशों में वेदांत की शिक्षा के प्रचार प्रसार में जुटे हैं।


देश में संचालित करते हैं सवा सौ छात्रालय
स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा बनाई गई अखिल भारतीय सेवा अभियान संस्था के अंतर्गत देश के अनेक राज्यों में करीब सवा सौ छात्रालय स्थापित किए गए हैं। इनमें से अकेले उत्तराखंड में चार छात्रालय स्थापित हैं। हरिद्वार, श्रीनगर पौड़ी, चमोली के कर्णप्रयाग और देहरादून के रानीपोखरी में स्थापित हैं। उक्त चारों में करीब डेढ़ सौ विद्यार्थियों को अध्ययन और आवासीय सुविधा उपलब्ध है।  इसके अलावा भारतभर में संचालित कुल सवा सौ छात्रालयों में करीब 10 हजार छात्र-छात्राओं को निशुल्क शिक्षा, भोजन और आवासीय व्यवस्था दी जा रही है।


गुरु भाई और शिष्य एक साथ नवाज गए
सोमवार को भारत सरकार द्वारा दिए गए पुरस्कारों के मौके पर यह भी अजब संयोग है कि दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपर स्टार रजनीकांत को भी आज ही के दिन पद्म विभूषण अवार्ड से नवाजा गया है। रजनीकांत भी स्वामी दयानंद के शिष्य हैं। दूसरी ओर यह भी संयोग ही है कि चिन्मया मिशन के प्रमुख संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद महाराज के दो शिष्यों स्वामी दयानंद सरस्वती और स्वामी तेजोमयानंद को एक साथ सोमवार को पद्म भूषण सम्मान प्राप्त हुआ है।

दुनिया में बांटा उपनिषदों का ज्ञान
स्वामी दयानंद सरस्वती ने भारत समेत अमेरिका, कनाडा, ब्राजील, चाइना, जापान,न्यूजीलैंड समेत अन्य कई यूरोपिय देशों इटली, स्पेन आदि में भी लोगों को वेदांत, उपनिषद जैसे भारतीय धर्मग्रंथों के दर्शन से रूबरू कराया।
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