तीर्थनगरी में कैंप संचालक राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के आदेश की जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं। कैंप संचालक प्रतिबंधित नदी के 100 मीटर के दायरे में पर्यटकों को बीच कैंपिंग करा रहे हैं। कैंपों के नदी से सटे होने के कारण दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। बीच कैंपिंग को लेकर प्रशासन भी आंखे मूंदे हुए है।
एनजीटी ने वर्ष 2015 में गंगा और उसकी सहायक नदी में सौ मीटर की परिधि के अंदर बीच कैंपों के संचालन पर रोक लगा दी थी। तब टिहरी प्रशासन की ओर से शिवपुरी क्षेत्र और पौड़ी प्रशासन की ओर से हेंवल नदी तट पर संचालित बीच कैंपों को हटाकर महज औपचारिकता निभाई गई थी। नतीजन हेंवल घाटी क्षेत्र के रत्तापानी, घट्टू गाड़, मोहनचट्टी, बैरागढ़, नैल और शिवपुरी क्षेत्र में खुलेआम बीच कैंपों का संचालन किया जा रहा है। शिवपुरी क्षेत्र में पर्यटक गंगा किनारे संचालित कैंपों में मौज मस्ती करने के बाद स्नान के लिए गंगा तट की ओर रुख करते हैं। जहां वे नशे की हालत में गंगा की तेज प्रवाह में बह जाते हैं। नदी के तट पर वे खाने, पीने के साथ ही नशे का सेवन करते हैं। उसके बाद सारा कूड़ा-करकट नदी में छोड़ देते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि शिवपुरी में नदी किनारे के क्षेत्र को कैंपिंग के लिए प्रतिबंधित घोषित किया गया था। करीब तीन महीने पहले टिहरी प्रशासन ने खानापूर्ति के लिए क्षेत्र का निरीक्षण किया। बावजूद इसके आज भी गंगा तट पर बीच कैंपों का किया जा रहा है।
गंगा नदी के तटों पर बीच कैंपों के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगी है। इसके बाद भी यदि कैंप संचालक नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं तो इसकी जांच की जाएगी। गंगा तटों पर संचालित बीच कैंपों को हटाया जाएगा।
-देवेंद्र नेगी, एसडीएम नरेंद्रनगर।