परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने भारतीय समाचार पत्र दिवस के अवसर पर पत्रकारों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि अखबार सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि हाशिए पर खड़े व्यक्तियों की आवाज है। समाचार पत्रों का मूल उद्देश्य सेवा भाव से है। समाचारपत्रों में सशक्त शक्ति होती है, जिसके कारण वे सामाजिक उत्तरदायित्व को निभाते हैं। समाचारपत्र और पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जो बेजुबान लोगों की सशक्त आवाज के रूप में कार्य करता है। एक जागृत, जीवंत, निर्भीक, स्वतंत्र और आलोचनात्मक समाचारपत्रों और मीडिया के बिना एक जीवंत लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती है। स्वतंत्र मीडिया न केवल सार्वजनिक उद्देश्य के समाचार और विचारों को प्रसारित करता है, बल्कि एक सशक्त प्रहरी के रूप में भी काम करता है। लोकतंत्र की सफलता के लिए समाचारपत्र और जीवंत मीडिया एक महत्वपूर्ण पैरामीटर के रूप में कार्य करते हैं।
समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा में जोड़ने के साथ-साथ हमारे प्राकृतिक संसाधन और धरती मां को भी जीवंत बनाए रखने में मीडिया अद्भुत रोल निभा सकता है।