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मकर संक्रांति पर लगाई आस्था की डुबकी

Fri, 15 Jan 2016 01:15 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ऋषिकेश
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मकर संक्रांति पर्व पर तीर्थनगरी में हजारों श्रद्धालुओं ने मोक्षदायनी गंगा में पुण्य की डुबकी लगाई। इस दौरान उन्होंने सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। साथ ही पितरों को तर्पण, भिक्षुओं, गरीबों और ब्राह्मणों को सूर्य भगवान के निमित्त विभिन्न वस्तुओं का दान दिया।
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गंगा तटों पर स्नान, दान, तर्पण का सिलसिला ब्रह्ममुहूर्त से दोपहर बाद तक जारी रहा। हालांकि, अर्द्धकुंभ मेले के दृष्टिगत पहले स्नान पर्व पर तीर्थनगरी में अपेक्षाकृत कम श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। इस दौरान स्वर्गाश्रम और लक्ष्मणझूला में आमतौर पर खचाखच भरे रहने वाले गंगा घाटों पर सन्नाटा सा पसरा रहा।

मकर संक्रांति पर्व पर बृहस्पतिवार को तीर्थनगरी में हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था और श्रद्धा की डुबकी लगाई। इनमें बाहरी प्रांतों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम रही। मकर संक्रांति पर त्रिवेणीघाट समेत मुनिकीरेती, स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला और तपोवन आदि क्षेत्रों में गंगा घाटों, तटों पर ब्रह्ममुहूर्त से ही स्नान के लिए श्रद्धालु जुटने लगे थे।
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लोगों ने गंगा स्नान के बाद पितरों के निमित्त तर्पण दिया। श्रद्धालुओं ने घाटों पर गरीबों, भिक्षुओं और ब्राह्मणों को आटा, चावला, तिल के लड्डू दान देकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान पर्व स्नान पर अधिकांश स्थानीय लोग और पहाड़ी क्षेत्रों से श्रद्धालु जुटे थे। खासकर स्वर्गाश्रम और लक्ष्मणझूला क्षेत्र में गंगाघाट, तटों पर दिन भर गिने चुने तीर्थयात्री ही दिखाई दिए।


मकर संक्रांति स्नान आज
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार सूर्य भगवान शनि की राशि मकर में बृहस्पतिवार रात डेढ़ बजे प्रवेश कर रहे हैं। लिहाजा इस बार मकर संक्रांति का स्नान शुक्रवार को होगा। बृहस्पतिवार को परंपरागत तौर पर मकर संक्रांति मनाई गई।

ज्योतिषाचार्य पंडित जयकृष्ण सेमवाल के अनुसार सूर्य भगवान अपने पुत्र शनि के घर दो महीने यानि माघ और फाल्गुन मास में रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस मास में माघ के महात्म्य का श्रवण और मासभर गंगा स्नान विशेष पुण्यदायी है।

उन्होंने बताया कि माघ मास में गंगा स्नान करने वाले व्यक्ति पुनर्जन्म के बंधनों से मुक्त हो जाता है और उसे बैकुंठ धाम की प्राप्ति हो जाती है। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति पर्व पर काले तिल से बनी मीठी वस्तु का दान, सूर्य का दान चावल, आटा, तिल दान और तिल का लड्डू विशेष फलदायी होता है।
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