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Rishikesh: वाहन में लिफ्ट देकर करते थे ठगी, अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार

Sun, 15 Sep 2024 07:04 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश

सार

ऋषिकेश क्षेत्र में ठगों का एक गिरोह भोले भाले लोगों को अपना शिकार बना रहा था। यह गिरोह लोगों को अपने वाहनों में लिफ्ट देकर उनसे ठगी करता था।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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लोगों को अपने वाहन में लिफ्ट देकर ठगी का शिकार करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का कोतवाली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के तीन गुर्गों को गिरफ्तार किया है। जिनमें से दो पर जनपद देहरादून के अन्य थानों में भी मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदेश के बाहर के आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपियों से नकदी व गहने भी बरामद किए गए हैं।
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ऋषिकेश क्षेत्र में ठगों का एक गिरोह भोले भाले लोगों को अपना शिकार बना रहा था। यह गिरोह लोगों को अपने वाहनों में लिफ्ट देकर उनसे ठगी करता था। इस संंबंध में कोतवाली में दो मुकदमे भी दर्ज हैं। पुलिस लगातार ठगों की गिरफ्तारी का प्रयास कर रही थी।

सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी सहायता से पुलिस ने संदिग्धों को चिह्नित किया था। बीते शुक्रवार देर रात पुलिस ने खांड गांव के समीप से संदिग्धों को मय वाहन गिरफ्तार किया। पूछताछ में ठगी की पुष्टि हुई।
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कोतवाल आरएस खोलिया ने बताया कि आरोपियों की पहचान अब्दुल मलिक निवासी जहांगीरपुरी दिल्ली, जगत सिंह बिष्ट निवासी ग्राम बासबाडा, नंदानगर जनपद चमोली, मोहम्मद कासिब निवासी मोहल्ला बल्ली मरान चांदनी चौक दिल्ली के रूप में हुई है। कोतवाल ने बताया कि मोहम्मद कासिब व जगत सिंह के खिलाफ डोईवाला, रायवाला व नेहरू काॅलोनी थाने में भी मुकदमे दर्ज हैं।

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इन्होंने कराया था मुकदमा दर्ज
बीते 12 अगस्त को चिन्यालीसौड़ उत्तरकाशी निवासी खिलानंद नौटियाल ने कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। ठगों ने उनसे 18 हजार रुपये ठग लिए थे। दूसरा मुकदमा कीर्तिनगर निवासी चैतूराम ने दर्ज कराया था। वह कीर्तिनगर जाने के लिए एक युवक की कार में बैठे थे। उनसे 43 हजार रुपये और सोने की अंगूठी ठग लिए थे।

ऐसे करते थे ठगी
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि तीनों मिलकर लोगो से ठगी करते है। भोले भाले लोगो को कार में लिफ्ट देते हैं और चेकिंग का भय दिखाकर उनके पैसे व सामान एक लिफाफे में रख देते है। ठगों ने बताया कि पहले से ही उसी प्रकार का एक लिफाफा उनके पास होता है, जिसके अंदर कागज के टुकड़े होते हैं और चालाकी से बदल देते हैं। जगत सिंह बिष्ट गढ़वाली भाषा का प्रयोग कर लोगो को अपने विश्वास में लेता था। बताया कि ज्यादातर घटनाएं बस अड्डा, रेलवे स्टेशन, मुख्य चौक चौराहों के आसपास करते है। ठगी से जो पैसा या सोने का सामान मिलता है, उसे आपस में बांट लेते है।
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