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बंद हुआ आईडीपीएल का अस्थायी कोविड अस्पताल

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ऋषिकेश। कोविड की दूसरी लहर के दौरान डीआरडीओ ने आईडीपीएल में 500 बेड वाले कोविड अस्पताल का निर्माण किया था। एम्स ऋषिकेश ने इसका संचालन बंद कर 17 नवंबर को यहां भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया था। वहीं डाक्टरों और कर्मचारियों का कार्यकाल समाप्त कर दिया गया है। प्रदेश में फिर कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में मरीजों के लिए उपचार का संकट पैदा हो सकता है।
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कोरोना की दूसरी लहर के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने 27 मई को डीआरडीओ देहरादून की ओर से आइडीपीएल में 500 बेड के राइफलमैन जसवंत सिंह अस्थायी कोविड स्पताल का लोकार्पण किया था। केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयासों से यह अस्पताल डेढ़ महीने में बनकर तैयार हुआ था। इस अस्पताल के संचालन की जिम्मेदार एम्स ऋषिकेश को दी गई थी। कोविड अस्पताल में मरीजों को ऑक्सीजन बेड, आईसीयू, वेंटिलेंटर और अन्य सभी जरूरी जांचों की सुविधा मिल रही थी। अस्पताल में डाक्टरों और स्टाफ की तैनाती की गई थी। इनके वेतन का भुगतान सरकार की ओर से किया जा रहा था, लेकिन 17 नवंबर को डीआरडीओ की ओर से यहां भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज करने के बाद यहां मरीजों के इलाज का काम बंद हो गया है। यहां पर केवल हाउस कीपिंग कर्मचारियों और सुरक्षागार्ड्स को रखा गया है। एम्स ने डाक्टरों और कर्मचारियों का कार्यकाल समाप्त कर दिया। प्रदेश में एक बार फिर कोरोना अपने पैर पसारने लगा है। रोजाना कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में अगर कोरोना संक्रमण फिर बेकाबू हुआ तो मरीजों के लिए उपचार का संकट पैदा हो सकता है।
फिलहाल अस्थायी कोविड अस्पताल में कोई भी कोरोना संक्रमित भर्ती नही हैं। अस्पताल के संचालन और व्यवस्थाओं को लेकर एम्स प्रशासन की ओर शासन को पत्र लिखा गया है। अब तक पत्र का जवाब नहीं मिला है। अगर कोरोना केस मिलते हैं तो उनका इलाज किया जाएगा।
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-हरीश मोहन थपलियाल, पीआरओ, एम्स ऋषिकेश
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