ऋषिकेश। शहर में शीतलहर के कारण पारा नीचे गिर रहा है। रात को तापमान आठ-नौ डिग्री हो रहा है। ऐसे में शहरवासियों और राहगीरों को शीतलहर से बचाने के लिए निगम की ओर से अलाव की व्यवस्था की जा रही है। लेकिन अलाव जलाने की नियमित मॉनिटिरिंग न होने से अलाव जलाना फिजूलखर्ची साबित हो रहा है।
नगर निगम की ओर शहर के अलग अलग वार्डों में भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर राहगीरों, यात्रियों, सब्जी व्यापारियों, दुकानदारों, बस के चालक परिचालकों को राहत पहुंचाने के लिए करीब 15 दिन पहले अलाव जलाने की व्यवस्था की थी। शुरू में नगर निगम की ओर से शहर में चार स्थानों पर अलाव जलाया जा रहा था। नगर निगम की ओर से हर रात को डेढ़ से तीन कुंतल लकड़ी जलाई जाने के दावे किए जा रहे हैं। 31 दिसंबर से कड़ाके की ठंड पड़ने पर नगर निगम की ओर से आठ अन्य स्थानों पर अलाव जलाए गए। कुल 12 स्थानों पर अलाव जलाने के दावे किए जाते रहे। लेकिन जब शनिवार की रात करीब पौने नौ बजे अमर उजाला की टीम ने आईएसबीटी परिसर (आउट गेट) और चंद्रभागा पुल के पास आईएसबीटी रोड पर मौके पर जाकर वास्तविक जांच की तो मौके पर अलाव नहीं जल रहा था। आईएसबीटी में केवल दो कच्ची सी लकड़ियां और एक पेटी का बुझा हुआ टुकड़ा मिला। चंद्रभागा पुल के पास कोई लकड़ी जलती नहीं मिली। आईएसबीटी पर मौजूद रोडवेज के कर्मचारियों से टीम ने बात की तो एक कर्मचारी ने बताया कि शुक्रवार की रात को तो यहां पर निगम की ओर से लकड़ी नहीं डाली गई थी। शनिवार को जो लकड़ियां डाली जा रही है वह कच्ची हैं, और बहुत कम भी हैं।
....तो एक स्थान पर डाली जा रही साढे 12 किग्रा. लकड़ी
- नगर निगम की ओर से अवगत कराया गया कि शनिवार की रात को 150 किग्रा. लकड़ी डाली गई। ऐसे में एक स्थान पर करीब साढ़े 12 किलो लकड़ी डाली जा रही है। जो बहुत कम है। जबकि निगम कर्मचारियों का कहना है कि कभी तीन कुंतल भी डाली गई।
जहां ज्यादा पब्लिक वहां डाली जाए ज्यादा लकड़ी
ऋषिकेश। नगर निगम की ओर से जिन स्थानों पर लकड़ी डाली जा रही हैं, सभी स्थानों को एक पैमाने से मापा जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिन स्थानों पर देर रात तक लोगों का आवागमन होता है उन स्थानों पर ज्यादा लकड़ी डालनी चाहिए। जैसे आईएसबीटी, चंद्रभागा चौक और सब्जी मंडी। यहां रातभर आवागमन शुरू रहता है।
कोट-
शहर में कहां कहां अलाव जल रहे हैं, संसाधनों के अभाव में रात को आकस्मिक जांच नहीं हो पाती, अलाव जलाने वाले कर्मचारी जिस फोटो खींचकर भेजते हैं उसी को फोटो को आधार माना जाता है।
- विनोद लाल, सहायक नगर आयुक्त नगर निगम ऋषिकेश