ऋषिकेश। आज राज्य निर्माण को 21 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। लेकिन पूरे विश्व में अपने दम पर योगनगरी के तौर पहचान बनाने वाला ऋषिकेश विकास को तरस रहा है। ऋषिकेश को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे तो काफी किए जाते हैं। लेकिन बुनियादी सुविधाओं के मामले में पर्यटन नगरी की स्थिति कस्बे से भी बेहतर नहीं है।
हरिद्वार-ऋषिकेश मुख्य मार्ग पर डेढ़ दशक से जाम की समस्या बनी हुई। स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों की जाम की समस्या से जूझते हैं। मुख्य मार्ग के विस्तारीकरण की कई बार तैयारी की गई। लेकिन हर बार विस्तारीकरण की कवायद ठंडे बस्ते में चली गई। पर्यटक ऋषिकेश में इसलिए नहीं रुकता क्योंकि शहर में पार्किंग ही नहीं है। हाल यह है कि पर्यटक से लेकर स्थानीय लोग मजबूरी में मुख्य मार्ग पर वाहन खड़े करते हैं। जनप्रतिनिधि चुनाव के दौरान जनता को चंद्रभागा नदी के पास मल्टी स्टोरी पार्किंग का सपना दिखाते हैं। लेकिन यह वादा भी कोरा साबित हो रहा है। ऋषिकेश के बोटल नेक श्यामपुर फाटक पर अब तक रेलवे ओवरब्रिज और फ्लाइओवर नहीं बन पाया है। ऋषिकेश के पर्यटन और पौराणिक स्थलों को विकसित करने के लिए भी अब तक कोई सार्थक पहल नहीं की गई है। ऋषिकेश शहर के बीचों बीच ट्रंचिंग ग्राउंड में एक दशक से गंदगी का ढेर सड़ रहा है। कूड़े के निस्तारण की प्रकिया तो शुरू हुई, लेकिन शहर अब तक कूड़ा मुक्त नहीं हो पाया है। शहर का अंदरूनी सड़कों का तो बहुत बुरा हाल है। कहीं सड़कों में गड्ढे है तो कहीं ड्रेनेज सिस्टम फेल होने के चलते बारिश में लोगों को जलभराव से दो चार होना पड़ता है। ऋषिकेश के देहात क्षेत्र रायवाला, श्यामपुर क्षेत्र के कई गांवों में पक्की सड़कें नहीं है। श्यामपुर और रायवाला के क्षेत्र के कई गांवों के आसपास पक्के तटबंध न होने के चलते गंगा और बरसाती नदियों का कहर झेलते हैं। कई गांवों में पेयजल व्यवस्था के बुरे हाल हैं।