ऋषिकेश। यूपीआई लेन-देन से जुड़े नए नियमों पर तीर्थनगरी के व्यापारियों में आक्रोश है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार ने कैशलेस व्यवस्था को बढ़ावा दिया और अब दो हजार रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान पर टैक्स लगाने से छोटे-बड़े कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि नियम वापस नहीं लिए गए तो दुकानों से यूपीआई बारकोड हटाकर डिजिटल भुगतान बंद किया जा सकता है। व्यापारियों के मुताबिक इससे ग्राहकों को नकदी पर निर्भर होना पड़ेगा और त्योहारी सीजन में एटीएम-बैंकों पर भीड़ बढ़ने के साथ कारोबार प्रभावित हो सकता है।
क्या हिते हैं व्यापारी
1-सरकार ने पहले व्यापारियों को कैशलेस व्यवस्था अपनाने के लिए योजनाएं चलाईं। छोटे-बड़े सभी व्यापारियों ने यूपीआई और डिजिटल भुगतान को अपनाया लेकिन अब उसी व्यवस्था पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात कही जा रही है। यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो व्यापारी मजबूर होकर डिजिटल भुगतान की सुविधा हटाकर केवल नकद में कारोबार करने को बाध्य होंगे।- लोकेश कुमार,
2- यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में दुकानों से यूपीआई बारकोड हटाए जा सकते हैं। इसका असर आगामी त्योहारी सीजन की खरीदारी पर भी दिखाई दे सकता है। डिजिटल सेवा बंद किए जाने से सीजन में बाहरी राज्यों से आए पर्यटकों को एटीएम का सहारा लेना पड़ सकता है जिससे शहर के एटीएम पर अधिक दबाव पड़ सकता है। -हर्षित गुप्ता,
3- डिजिटल भुगतान बंद होने से लोगों को एटीएम से नकदी निकालने के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ सकता है। साथ ही व्यापारियों को भी बैंक में नकदी जमा कराने के लिए अतिरिक्त समय खर्च करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिस व्यवस्था ने बाजार में लेन-देन को आसान बनाया, उसे शुल्क के बोझ से पीछे धकेलना व्यापारियों के हित में नहीं है।-नारायण कक्कड़,