युवक से हजारों रुपये की नकदी बरामद, मोबाइल पर लाखों का लेनदेन
कोविड-19 के दौरान डीआरडीओ हॉस्पिटल में अटेंडेंट के रूप में कर चुका है काम
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में फर्जी डॉक्टर बनकर घूम रहा युवक अस्पताल प्रशासन ने दबोच लिया। प्रशासन ने एम्स पुलिस चौकी को एक लिखित शिकायत देकर आरोपी युवक को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस छानबीन में जुट गई है।
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे एक युवक संदिग्ध परिस्थितियों में डॉक्टर की वर्दी पहनकर एम्स परिसर में घूमता दिखाई दिया। जिसे देख एम्स के सेवावीर टीम में शामिल कर्मियों और सुरक्षा कर्मियों ने रोक दिया। पूछताछ करने पर युवक ने खुद को न्यूरोलॉजी विभाग का डॉक्टर बताया। लेकिन युवक की बातों पर यकीन नहीं हुआ। जिसके बाद एम्स के प्रशासनिक अधिकारी और कानूनी अधिकारी मौके पर आए।
मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी संदीप कुमार ने एम्स चौकी पुलिस को लिखित शिकायत देकर फर्जी डॉक्टर बने युवक के खिलाफ जांच पड़ताल और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस ने युवक की पहचान कृष्णानगर कॉलोनी ऋषिकेश निवासी सचिन कुमार के रूप में की है। पूछताछ के बाद सचिन ने बताया कि उसने कोविड-19 के दौरान डीआरडीओ की ओर से तैयार किए गए अस्पताल में बतौर हॉस्पिटल अटेंडेंट के रूप में काम किया है।
अस्थायी हॉस्पिटल बंद होने के बाद कहीं चला गया था। जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने बताया कि आरोपी युवक से करीब 10 हजार रुपये बरामद हुए हैं। जबकि उसके मोबाइल से लाखों रुपये का लेन देन भी हुआ है। इसके अलावा कई प्रकार के फर्जी दस्तावेज भी उसके मोबाइल में देखे गए हैं। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक केआर पांडेय ने बताया कि युवक के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस इस ओर छानबीन में जुट गई है।