ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। सोमवार को पड़ रही मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान के बाद दान का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य पंडित चंडी प्रसाद घिल्डियाल के अनुसार प्रात: मौन रहकर गंगा स्नान करना अत्यंत लाभदायी है। इस दिन पितरों के मोक्ष के लिए तर्पण और ब्राह्मणों को दान करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सीपी घिल्डियाल का कहना है कि मुनि शब्द से ही मौनी शब्द की उत्पत्ति हुई है। इस दिन मौन धारण करने वाले मानव को मुनि पद की प्राप्ति होती है। ज्योतिषीय दृष्टि से देखने पर पता चलता है कि मौनी अमावस्या के दिन एलर्जी तथा कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति यदि गंगा स्नान के पश्चात सूर्य व पितरों को अर्घ्य देता है, तो ग्रहों में इन रोगों के लिए जिम्मेदार बुध व केतु ग्रह को शांत किया जा सकता है।
राशि के स्वामी ऐसे करें पूजा
मौनी अमावस्या के दिन मेष राशि वाले तांबे का सिक्का लेकर, वृष राशि दूध व मिश्री, मिथुन राशि मूंग की दाल, कर्क राशि सफेद फूलों से, सिंह राशि लाल चंदन से, कन्या राशि मूंगदाल, तुला राशि सफेद चंदन से, वृश्चिक राशि गुड़दान करके, धनु राशि यज्ञोपवीत तथा जौ लेकर, मकर राशि काले तिलों से, कुंभ राशि अनार के फल से तथा मीन राशि के स्वामी केले के फलों का दान कर पूजा करें। इससे इन सभी राशि स्वामियों को विशेष फल की प्राप्ति होगी।