ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। वीरपुर खुर्द में वन विभाग के वीरभद्र ब्लॉक में करीब पांच बीघा जमीन पर गुपचुप कब्जा कर अवैध निर्माण संबंधी मामले में जांच की सिफारिश ठंडे बस्ते में चली गई है। इस मामले में वन क्षेत्राधिकारी ने मौका मुआयना करने के बाद डीएफओ को जांच की सिफारिश भेजी थी। सिफारिश के 16 दिन बीत जाने के बाद भी डीएफओ की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। दूसरी ओर उक्त भूमि पर निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है।
बता दें कि वीरपुर खुर्द के वीरभद्र ब्लॉक में रंभा नदी के तट से सटी हुई वन विभाग की करीब 701 हेक्टेयर भूमि है। इस भूमि पर वन विभाग की ओर से वन क्षेत्र के सौ मीटर के दायरे में कोई भी निर्माण कार्य न करने का बोर्ड लगा रखा है। इसके बावजूद निषिद्घ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किया जा रहा है। इतना ही नहीं, निर्माणकर्ता ने यहां तारबाड़ से हुए सीमांकन को भी खुदबुर्द कर दिया है। स्थानीय लोगों से पूछताछ पर जानकारी मिली थी कि यहां रिसॉर्ट बनाया जा रहा है।
हैरानी की बात तो यह है कि इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों को भनक तक नहीं है। ‘अमर उजाला’ में मामला प्रकाशित होने के बाद वन क्षेत्राधिकारी आरपीएस नेगी ने मामले पर संज्ञान लेते हुए बीती 17 जनवरी को उक्त निर्माणाधीन क्षेत्र का मौका मुआयना किया था। इसके बाद वन क्षेत्राधिकारी ने मामले की जांच सिफारिश डीएफओ राजीव धीमान को भेजी थी। गंभीर पहलू यह है कि निर्माण पर न तो रोक लगाई गई न ही जांच को अमल में लाया गया। वन विभाग के अफसरों की इस कार्यप्रणाली का फायदा भूमाफिया उठा रहे हैं। कागजी कोरम पूरा करने के 16 दिन बाद भी अफसरों को वन विभाग की जमीन पर हो रहे निर्माण को लेकर फिक्र नहीं है।
कोट्स
उक्त भूमि पर हो रहे निर्माणकार्य के लिए सर्वे किया जाना है, चूंकि हमारी सभी टीम हाईकोर्ट के एक सर्वे में देहरादून में व्यस्त है। लिहाजा दो-चार दिनों में टीम अपना काम करके लौटेगी। इसके बाद टीम निर्माणाधीन क्षेत्र में सर्वे कर सीमांकन का भौतिक सत्यापन करेगी। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर अगला कदम उठाया जाएगा।
- राजीव धीमान, डीएफओ।
मैंने डीएफओ को अपने स्तर से जांच करवाने की सिफारिश की है। मैं खुद मौका मुआयना कर चुका हूं। मामले की जांच की सिफारिश की गई है। फिलहाल अब जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किया जाएगा।
- आरपीएस नेगी, वन क्षेत्राधिकारी