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आदर्श व्यवस्था में समाज सबसे ऊपर होता है: बजरंग मुनि

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । बजरंग मुनि सामाजिक शोध संस्थान में साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ के तहत न्यायालय की स्वतंत्रता और सीमाएं विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर बजरंग मुनि ने कहा कि दुनिया की वर्तमान सामाजिक व्यवस्था आदर्श सामाजिक व्यवस्था से बहुत अलग है। आदर्श व्यवस्था में समाज सबसे ऊपर होता है और राष्ट्र या धर्म सहायक। उन्होंने कहा कि आदर्श व्यवस्था में व्यक्ति की स्वतंत्रता सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है। प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता प्राकृतिक रूप से समान होती है।
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शोध संस्थान के निदेशक आचार्य पंकज ने कहा कि उचित नहीं है कि विधायिका की गलतियों का लाभ उठाकर न्यायपालिका तानाशाही की ओर बढ़ना शुरू कर दे। भारत की जनता ना किसी अव्यवस्था को स्वीकार करेगी और ना तानाशाही को। विधायिका और न्यायपालिका के बीच सर्वोच्च बनने की खींचतान बंद होनी चाहिए। संविधान के अनुसार तंत्र की तीनों इकाइयां समकक्ष हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय संयोजक अभ्युदय भाई ज्ञान, संरक्षक प्रमोद कुमार वात्सल्य, संजय तिवारी, संतोष मुनि, जय कुमार तिवारी, शुभेंदु महापात्र, अनुसूया प्रसाद बिजल्वाण, केके पांडे, नागेंद्र असवाल, शरत कुमार मिश्रा, अवनीश मिश्र, मंगल प्रसाद, अग्नि महापात्रा, अरविंद तिवारी, शोभन नेगी आदि मौजूद थे।
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