ब्यूरो/अमर उजाला, मुनिकीरेती। पर्यटन विकास परिषद के अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के तीसरे दिन आध्यात्मिक गुरु स्वामी मोजी बाबा ने भारत की संस्कृति, अध्यात्म और योग की जानकारी से साधकों को रूबरू कराया। उन्होंने अध्यात्म, योग और देशभक्ति का समागम सहित बेटियों का सम्मान और पर्यावरण सुधार का व्यापक संदेश भी योग साधकों को दिया। मुनिकीरेती स्थित गढ़वाल मंडल विकास निगम के गंगा रिसोर्ट में आयोजित योग महोत्सव के दौरान गुरु मोजी बाबा ने कहा कि उत्तराखंड पहले से ही आध्यात्म का गढ़ रहा है। हिंदुओं की आस्था का मूल स्रोत गंगा का उद्गम स्थल भी यहीं है। यहां की संस्कृति, खानपान, वेशभूषा, सादगी, सरलता और सहजता संसाधन के अभाव के बाद भी बार बार पर्यटकों को यहां आने को आकर्षित करती है।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त योग गुरु चंद्रमोहन भंडारी ने कहा कि वेदों का ज्ञान भारतीय संस्कृति की धरोहर है। योग और आयुर्वेद विधाएं इसी अपार वेदांत ज्ञान से सिंचित हैं। योग गुरु अमृत देसाई ने योग निद्रा, योगी विस्वकेतु ने अखंड योग, प्राणायाम, राजीव तिवाड़ी ने यौगिक मेडिटेशन, योगी विश्वपाल जयंति ने योग एंड न्यूरोपैथी, सिदार्थ जी ने फंडामेंटल आइडियाज ऑफ योगा इन द उपनिषद, विवेक पंवार ने स्वर तंत्र, अरुण पेरुमाल ने हठ योग, योगी रजनीश ने ट्रेडिशनल योग, डॉक्टर लक्ष्मी नारायण जोशी ने नाड़ी विज्ञान, आर्ट ऑफ लिविंग ने सूक्ष्म योग, स्ट्रोबल्स, आशुतोष ने मैकेनिज्म ऑफ वर्ल्ड पीसवाई योगा, अनंयानिचोले ने योगासना, सीएम भंडारी ने सीक्रेट्स ऑफ योग, प्रशांत जखमोला ने अष्टांग विन्यास की शिक्षा से योग साधकों को परिचित कराया गया।