नैनीताल हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने सहयोगियों के साथ राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल से मुलाकात की। करीब 20 मिनट की इस मुलाकात को रावत ने शिष्टाचार भेंट बताया। रावत ने नौ बागी विधायकों और राष्ट्रपति शासन के दौरान लिए गए फैसलों पर अपने रुख को स्पष्ट करने से इनकार किया।
बृहस्पतिवार देर शाम मुख्यमंत्री हरीश रावत दल बल के साथ राज्यपाल से मिलने पहुंचे। उनके साथ संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश, राजस्व मंत्री यशपाल आर्य, स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, गृह मंत्री प्रीतम सिंह, शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, पर्यटन मंत्री दिनेश धनै, श्रम मंत्री हरीशचंद्र दुर्गापाल, फुरकान अहमद, गणेश गोदियाल, हीरा सिंह बिष्ट आदि शामिल थे। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया।
पहले कहा जा रहा था कि हरीश रावत दावा पेश करने के लिए राज्यपाल के पास जा रहे हैं। हालांकि हाईकोर्ट के निर्णय पर तस्वीर साफ होने के बाद यह मामला बिल्कुल ही बदल गया।
राज्यापाल के निर्णयों पर टिप्पणी से इनकार
राज्यपाल से मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब हरीश रावत ने कांग्रेस के नौ बागी विधायकों और राष्ट्रपति शासन के दौरान लिए गए निर्णयों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उल्लेखनीय है कि 27 मार्च को प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा था और कांग्रेस सरकार की आबकारी नीति को 19 अप्रैल को बदल दिया गया था।
रावत ने उस समय आबकारी नीति को पलटने का पुरजोर विरोध जताया था। रावत ने हाईकोर्ट के फैसले को सत्य और न्याय की जीत बताया, कहा कि भाजपा ने प्रदेश को चार बड़े घाव दिए।
कटु अनुभवों को भूलना चाहूंगा: रावत
पहला दल बदल, दूसरा धन बल के जरिये सरकार गिराने, तीसरा प्रदेश की चुनी हुई सरकार के बजट को अध्यादेश के जरिए रद्द करने और चौथा मार्च-अप्रैल में प्रदेश के विकास कार्य की रफ्तार को धीमा करने का। रावत ने कहा कि कटुतापूर्ण अनुभवों को मैं भूलना चाहूंगा।
पीडीएफ के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पीडीएफ ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए कांग्रेस का साथ दिया। इस मौके पर कांग्रेस के सह प्रभारी संजय कपूर, विधायक राजकुमार, सरिता आर्य, मदन बिष्ट आदि भी साथ थे। राज्यपाल से मुलाकात के बाद देर शाम बीजापुर में हरीश रावत ने सहयोगी मंत्रियों और विधायकों के साथ बैठक भी की।