वर्ष 2008 में ट्रेनिंग लेकर आए प्रदेश के 66 रैंकर दारोगाओं को 1999 की वरिष्ठता देने की प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। सीधी भर्ती के दारोगाओं ने वरिष्ठता प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पुलिस मुख्यालय पर प्रत्यावेदन दिया है।
उन्होंने सवाल उठाया है कि उनके साथ दारोगा बने 1268 रैंकर दारोगाओं की वरिष्ठता को लेकर यूपी सरकार निर्धारण नहीं कर पाई है। यह भी कहा गया है कि इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति के लिए साक्षात्कार की तिथि घोषित करने के बाद वरिष्ठता का यह निर्धारण किसी भी नजरिए से न्यायोचित नहीं है।
उत्तर प्रदेश का विभाजन होने से पहले साल 1999 में रैंकर दारोगाओं की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसी बीच मामला कोर्ट में पहुंच जाने के कारण यह परीक्षा लटक गई थी। उत्तराखंड बनने के बाद साल 2006 में यूपी में यह रैंकर परीक्षा संपन्न कराई गई थी।
साल 2007 में ट्रेनिंग लेकर 2008 में यह दारोगा अपनी ड्यूटी पर आ गए। इनमें से 1268 यूपी के हैं, जबकि 66 यूके के हिस्से में आए। तब से रैंकर दारोगा वरिष्ठता पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
सोमवार को पुलिस मुख्यालय ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए प्रदेश के रैंकर दारोगाओं को भी 1999 की वरिष्ठता दे दी है। इस फैसले से 2002 में सीधी परीक्षा में बने दारोगाओं की रातों की नींद उड़ गई, क्योंकि इंस्पेक्टर बनने की लाइन में वह पिछड़ गए है।