एक बरस बीत गया। लेकिन, जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर राधे मां पर 11 सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट नहीं दी। ऐसे में राधे मां अब अखाड़े की महामंडलेश्वर बनी रहेंगी।
प्रयाग कुंभ में महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर बनाए गए दक्षिण भारत के संत स्वामी नित्यानंद को लेकर उठा विवाद भी अब समाप्त सा हो गया है।
एक जुलाई 2012 को आधी रात 12 बजे हरिद्वार के जूना अखाड़े में एक गुप्त समारोह में मुंबई की चर्चित राधे मां को महामंडलेश्वर पद प्रदान किया गया था।
जूना पीठाधीश्वर देश के जाने-माने संत स्वामी अवधेशानंद गिरि ने उन्हें दीक्षा प्रदान की थी। जैसे ही यह खबर फैली, संत जगत में रोष व्याप्त हो गया।
जूना अखाड़े को उसी दिन 11 सदस्यीय जांच समिति गठित करनी पड़ी। समिति से कहा गया था कि दो महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपे। लेकिन एक बरस बीत गया, एक सदस्य को छोड़कर किसी ने अपनी रिपोर्ट नहीं दी।
जिन पंचानन गिरि ने रिपोर्ट दी थी उनकी रिपोर्ट को अखाड़े ने उस समय अमान्य कर दिया। बाद में मान लिया गया। अत: राधे मां अखाड़े की महामंडलेश्वर बनी रहेंगी।
प्रयाग कुंभ में महानिर्वाणी अखाड़े ने जब रातोंरात दक्षिण के चर्चित संत स्वामी नित्यानंद को महामंडलेश्वर बनाया तो प्रयाग में कोहराम मच गया था।
अखाड़े ने सभी विरोधों को अमान्य कर दिया और निर्णय लिया कि स्वामी नित्यानंद अखाड़े के महामंडलेश्वर बने रहेंगे। चूंकि उन पर कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। अत: अखाड़ा नित्यानंद को महामंडलेश्वर का सम्मान प्रदान करता रहेगा।