हाईकोर्ट की ओर से राष्ट्रपति शासन हटाए जाने और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की अगुवाई में गठित सरकार ने लोक लुभावन फैसलों की झड़ी लगा दी।
मुख्यमंत्री की ओर से शुक्रवार को बीजापुर गेस्ट हाउस में बुलाई गई कैबिनेट बैठक में सभी तरह के पट्टाधारकों को जमीनों का मालिकाना हक और राज्य आंदोलनकारियों को पेंशन देने के अलावा हाईकोर्ट के फैसले के अनुपालन में 29 अप्रैल को विधानसभा सत्र बुलाए जाने को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजे जाने का निर्णय लिया गया।
हरीश रावत ने आनन फानन में बुलाई ती कैबिनेट की बैठक
अब जबकि सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है तो कैबिनेट में लिए गए सभी फैसले भी गर्त में चले गए। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बृहस्पतिवार देर रात आनन फानन में कैबिनेट बैठक बुलाई और 11 बडे़ फैसले लिए।
जिसमें राजकीय कालेजों में दो पाली कक्षाएं संचालित करने, अतिथि शिक्षकों 15,000 मासिक मानदेय देने, समाज कल्याण विभाग से जुड़ी तमाम पेंशन में 200 रुपये का इजाफा, सर्किट रेट रिवीजन कमेटी का गठन, चकबंदी और मलिन बस्ती सुधार विधेयक का अध्यादेश जारी करने, हल्द्वानी और देहरादून में स्पोर्ट्स स्टेडियम विकसित करने, पेयजल के लिए प्रत्येक जिले को पांच-पांच करोड़ रुपये, राठ महाविद्यालय पौड़ी और लालकुआं में लालबहादुर शात्री महाविद्यालय का राजकीयकरण करने का प्रस्ताव पारित किया था।
बहाली के आदेश के बाद 14 घंटे में लिए गए 14 फैसले
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत
- फोटो : file photo
पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने शुक्रवार को एक बार फिर सुबह साढ़े नौ बजे कैबिनेट बैठक बुलाई, जिसमें पट्टाधारकों को जमीनों का मालिकाना हक, राज्य आंदोलनकारियों को पेंशन और 29 को विधानसभा सत्र बुलाए जाने संबंधी प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। महज 14 घंटे में कैबिनेट ने 14 महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
इतना ही नहीं मुख्यमंत्री रावत ने नौकरशाहों को निर्देश दिया कि कैबिनेट ने जो फैसले लिए हैं उन पर अमल भी शुरू कर दिया जाए। अब जबकि सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है तो एक बार फिर पहले स्थिति बहाल हो गई है। आला अफसरों का कहना है कि कैबिनेट में लिए गए इन फैसलों का अब कोई मायने नहीं है।
पेयजल संकट के लिए कमेटी गठित, लेकिन...
हाईकोर्ट के फैसले के बाद कुर्सी संभालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जहां कैबिनेट बैठक बुलाकर 14 बड़े फैसले लिए। वहीं राज्य के विभिन्न इलाकों में उत्पन्न पेयजल संकट पर गंभीर चिता जताते हुए उन्होंने इससे निपटने के लिए आदेश अधिकारियों को दिया। उन्होंने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में मानीटरिंग कमेटी गठित कर दी।
अब जबकि हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीमकोर्ट ने रोक लगा दी है तो स्थिति क्या बनती है यह देखने वाली बात होगी। गर्मी शुरू होते ही सबसे ज्यादा देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और पर्वतीय जिलों में पीने के पानी का गंभीर संकट है।
फैसलों से नौकरशाही रही भौचक
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की अगुवाई में कैबिनेट द्वारा 14 घंटे के भीतर 14 बड़े अहम फैसले लिए जाने से नौकरशाही भौचक रही। नौकरशाहों को यही नहीं सूझ रहा था कि अभी अदालत का फैसला आया है और आनन फानन में कैबिनेट बुलाकर एक साथ इतने निर्णय ले लिए गए।
कुछ नौकरशाहों का दबी जुबान से कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री को कम से कम कुछ दिन तो इंतजार करना चाहिए था। एक नौकरशाह ने चुटकी लेते हुए कहा कि दो साल के शासनकाल में तो सरकार ने इतनी तेजी कभी नहीं दिखाई जितना अभी 14 घंटों में दिखा दी