पिथौरागढ़ । सीमांत जिले के 48 जर्जर स्कूलों में बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं। इन विद्यालयों की हालत इतनी दयनीय हो चुकी है कि डर के मारे अभिभावक अपने बच्चों को यहां से निकालकर दूसरे स्कूलों में भेज रहे हैं। जर्जर छतों के साए में भविष्य बुनते इन नौनिहालों की सुध लेने वाला कोई नहीं है जिससे शिक्षा विभाग के दावों की पोल खुल रही है।
शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले में एक उच्चतर माध्यमिक समेत तीन इंटर काॅलेज जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। इनके अलावा 40 प्राथमिक और पांच जूनियर हाईस्कूलों की दशा सुधारने के लिए विभाग से निदेशालय को प्रस्ताव भेजे गए हैं। विद्यालयों की बदहाल स्थिति से बच्चों और अभिभावकों में रोष पनप रहा है।
बीते दिनों बिण ब्लॉक के झूणी मलान क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने विद्यालय की जर्जर स्थिति को लेकर कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन भी किया था। उनका कहना था कि जर्जर विद्यालय भवन के चलते छात्र संख्या लगातार कम हो रही है। इसके अलावा धारचूला ब्लॉक के राजकीय इंटर कॉलेज पय्यापौड़ी और मुनस्यारी के जीआईसी खतेड़ा की स्थिति भी दयनीय है।
पय्यापौड़ी क्षेत्र की जिला पंचायत सदस्य दीपशिखा ऐरी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेज कहा है कि वर्ष 1964 में बने पंडित मोती राम जोशी राजकीय इंटर काॅलेज जर्जर हालत में पहुंच गया है। उन्होंने शीघ्र विद्यालय का पुनर्निर्माण किए जाने की मांग की है।
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जर्जर विद्यालयों के सुधारीकरण के प्रस्ताव शिक्षा निदेशालय को भेजे गए हैं। धनराशि स्वीकृत होते ही सुधारीकरण का कार्य शुरू कराया जाएगा।
-तरुण कुमार पंत, मुख्य शिक्षा अधिकारी पिथौरागढ़