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किससे मिलने आए हो मतदाता तो चले गए

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पलायन के कारण इस तरह बंजर हो रही हैं सुंदर बाखलिया। - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। हुक्मरान भले कुछ कहें लेकिन पलायन कम होने का नाम नहीं ले रहा है। चीन और नेपाल सीमा से सटे पिथौरागढ़ जिले में पलायन का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। पलायन आयोग की रिपोर्ट पहले ही साफ कर चुकी है कि जिले 41 गांवों में 50 फीसदी से ज्यादा आबादी का पलायन हो चुका है। हाल ही में जल-जीवन मिशन के सर्वे में भी 58 गांवों के गैर आबाद होने की पुष्टि हुई थी। वर्ष 2019 में जिले में 1600 गांव आबाद थे, लेकिन अब जिले में आबाद गांवों की संख्या घटकर 1542 हो चुकी है। चुनावी मौसम में जनता के बीच वोट मांगने जा रहे नेताओं को पलायन से खाली ये गांव उल्टा मुंह चिढ़ा रहे हैं। साथ ही उनके पलायन रोकने के दावे और विकास की पोल भी खोल रहे हैं।
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बेड़ीनाग के 24 गांव मानव विहीन
सीमांत जिले में 58 गांव ऐसे हैं जहां इंसानी जिंदगी की कोई आहट नजर नही आ रही है। लगातार बढ़ रहे पलायन के पीछे बिजली, पानी, सड़क, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली है। पलायन की सबसे अधिक मार बेड़ीनाग तहसील पर पड़ी है। बेड़ीनाग ब्लाक के 24 गांव मानव विहीन हो चुके हैं। गंगोलीहाट तहसील में 13 गांव खाली हो चुके हैं।
सरकारी योजनाएं लोगों को रोकने में असफल
कोरोना के बाद महानगरों में रहे रहे प्रवासियों ने गांवों की ओर रिवर्स पलायन किया। लाखों की संख्या में प्रवासी गांवों को लौटे। सरकार ने रिर्वस पलायन के बाद घर आए प्रवासियों के लिए कई योजनाएं भी संचालित की। योजना के मानकों में जटिलता के कारण कई प्रवासियों को सरकारी योजनाओं को लाभ नहीं मिल सका। कोरोना कम होने के बाद लाखों की संख्या में वापस आए प्रवासी फिर महानगरों को लौट गए।
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चीन और नेपाल सीमा से सटे गांवों से हो रहा पलायन चिंता का विषय
पिथौरागढ़। चीन और नेपाल सीमा से सटे गांवों से हो रहा पलायन चिंता का विषय है। लोगों का कहना है कि सीमा से सटे गांवों के सच्चे प्रहरी सीमांत के ही ग्रामीण हैं। कुछ समय पूर्व से ही सेना और अर्द्ध सैनिक बलों के जवान ही सीमा पर तैनात हुए हैं। जब सीमा पर कोई सेना नहीं थी तो सीमाओं की रक्षा सीमांत में रह रहे वाशिंदों ने ही की। सीमांत के वाशिंदों की हिम्मत के कारण हमारी सीमाओं पर दूसरा देश अतिक्रमण नहीं कर पाया। जिस तरह सीमांत के गांवों से पलायन हो रहा है, वो चिंता का विषय है। सीमा से लगातार हो रहा पलायन अंतरराष्ट्रीय सीमा को भी खतरे में डाल सकता है। संवाद
सीमा से सटे गांवों में असुविधाओं से बढ़ा पलायन
पिथौरागढ़। नेपाल में जब माओवाद चरम पर था, तब सरकार ने यह फैसला लिया था कि सीमा से लगे भारतीय गांवों में सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। वहां पर संचार, सड़क, स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए बाकायदा सर्वे भी किया गया लेकिन बाद में सरकार इन सुविधाओं को विस्तार देने का काम एक प्रकार से भूल गई। नेपाल सीमा से लगे दर्जनों गांवों की हालत अभी भी खराब है। नेपाल सीमा से लगे धौलकांडा, कुनकटिया, बारमौ, मेथला, मुनावे, सैनीखाल, धूरा, कफलानी, कटियौला, चौपाता, खिरौ, बथोली, अमकोट, सुअरगाड़, खर्कतड़ी, तालेश्वर, सिमपानी, गिठीगाड़ा, जुलाघाट से काफी संख्या में पलायन हुआ है।
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