कूटाचौरानी में वनरावतों को सोलर लालटेन देते डीएम
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वनरावतों के गांव कूटाचौरानी में रविवार को लगे बहुउद्देश्यीय शिविर में जिलाधिकारी डा. रंजीत सिन्हा ने राजस्व विभाग और वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि दस दिन में हर वनरावत परिवार को जमीन का पट्टा जारी करें। साथ ही उनको जमीन का मालिकाना हक दें। शिविर में 45 वनरावत परिवारों को उरेडा की तरफ से सोलर लालटेन दी गई। राजस्व विभाग ने कंबल बांटे। भूमि अधिकार मंच ने वनरावतों को जमीन का हक दिलाए जाने की मांग को लेकर लंबा संघर्ष किया था। बाद में सरकार ने फैसला लिया कि जंगलों में जहां पर भी वनरावतों के कब्जे में जमीन है, उसका हक दिलाया जाएगा।
शिविर में वनरावतों को आर्थिक सहायता देने, चिकित्सा सुविधा देने, पेयजल और रास्तों की व्यवस्था करने जैसे मामले उठाए गए। इलाके में होने वाले अवैध खनन और अवैध कटान पर अंकुश लगाने, राजकीय हाईस्कूल किरौली के भवन की मरम्मत की भी मांग की गई। डीएम ने कहा कि इन समस्याओं का समाधान करने के लिए संबंधित विभाग को लिखा जा रहा है। पहली बार वनरावतों की आबादी में लगे शिविर में सीडीओ आशीष चौहान, ब्लॉक प्रमुख जयंती देवी, कांग्रेस नेत्री रेवती जोशी, जिला पंचायत सदस्य हरेंद्र चुफाल, महेश सिंह, पार्वती देवी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष पुष्पा देउपा, बीडीओ डीआर लोहिया आदि थे। संचालन डीआरडीए के पीडी नरेश कुमार ने किया।
लकड़ी का कृत्रिम पांव बना दिया जीत सिंह ने
कूटाचौरानी निवासी 54 वर्षीय वनरावत जीत सिंह को चार वर्ष पहले समाज कल्याण विभाग ने कृत्रिम पांव उपलब्ध कराया था, लेकिन यह पांव फिट नहीं आया। जीत सिंह के पांव एक हादसे में कट गया था। लकड़ी के काम में पारंगत जीत सिंह ने अपने लिए खुद ही लकड़ी का कृत्रिम पांव बना दिया और आज वह शिविर में इसी पांव के सहारे 14 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचे थे। डीएम डा. रंजीत सिन्हा जीत सिंह की व्यथा को देखकर पसीज गए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और समाज कल्याण विभाग को निर्देश दिए कि जीत सिंह को पूरी जांच करने के बाद कृत्रिम पांव दिया जाए। ताकि उनको अपने हाथ से बनाए लकड़ी के कृत्रिम पांव की जरूरत न पड़े।