फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pithoragarh: कनार गांव में फैला वायरल और डायरिया, हेलीकॉप्टर से पहुंची मदद; बीमार ग्रामीणों का किया इलाज

Wed, 05 Aug 2026 09:28 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़

सार

कनार गांव में वायरल और डायरिया का प्रकोप फैल गया है। दो हजार की आबादी वाले इस गांव में 255 से अधिक ग्रामीण बीमारी से जूझ रहे हैं। हेलीकॉप्टर से कनार गांव पहुंचे स्वास्थ्य कर्मियों ने बीमार ग्रामीणों का इलाज कर उन्हें राहत पहुंचाई।
विज्ञापन
बंगापानी तहसील के दूरस्थ सड़क सुविधा से वंचित कनार गांव में ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण करते स्वा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पिथौरागढ़ जिले के बंगापानी तहसील के कनार गांव में वायरल और डायरिया का प्रकोप फैल गया है। दो हजार की आबादी वाले इस गांव में 255 से अधिक ग्रामीण बीमारी से जूझ रहे हैं। हेलीकॉप्टर से कनार गांव पहुंचे स्वास्थ्य कर्मियों ने बीमार ग्रामीणों का इलाज कर उन्हें राहत पहुंचाई।

बंगापानी तहसील के दो हजार की आबादी वाले कनार गांव में 255 से अधिक ग्रामीण वायरल और डायरिया से जूझ रहे हैं। तमाम दावों के बाद भी आज तक गांव सड़क से नहीं जुड़ सका है। इन हालात में बीमार ग्रामीणों के लिए 20 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार कर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचना नामुमकिन है। ऐसे में ग्रामीण दो दिन तक गांव में ही दर्द से कराहते हुए स्वास्थ्य कर्मियों के आने का इंतजार करते रहे। मौसम का साथ मिला तो सीएमओ डॉ. जेएस चुफाल ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष ग्रामीणों का दर्द साझा कर स्वास्थ्य कर्मियों को भेजने के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। बीते मंगलवार को डॉ. आशु अवस्थी, डॉ. मृगांक शुक्ला, फार्मासिस्ट विनोद मखोलिया और सीएचअसे नितेश बिष्ट को जरूरी दवा के साथ हेलीकॉप्टर से कनार भेजा गया। स्वास्थ्य कर्मियों ने दो दिन तक गांव में डेरा जमाते हुए शिविर लगाकर बीमारों के साथ ही अन्य ग्रामीणों का इलाज और स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें राहत पहुंचाई। वहीं बिस्तर में पड़े 90 साल के दो बुजुर्गों का घर पर इलाज किया गया। 

छह साल में समय पर इलाज न मिलने से पांच लोगों की हो चुकी है मौत

विज्ञापन

कनार गांव के ग्रामीण सड़क के अभाव में आए दिन अपनी जान गंवा रहे हैं। आजादी के 79 साल बाद भी कनार सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाया है। क्षेत्र के अत्यधिक दुर्गम में बसे इस गांव के ग्रामीणों को आए दिन तमाम दिक्कतों से जूझना पड़ता है। गांव तक पहुंचने के लिए एकमात्र पैदल मार्ग है। बरसात के दिनों इस मार्ग से आवाजाही कठिन हो जाती है। पहाड़ियों से पत्थर गिरने का भय लगातार बना रहता है। ऐसे में दुर्गम और बदहाल रास्ते पर डोली के सहारे पैदल सफर कर बीमारों और घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। समय पर अस्पताल न पहुंचने से बीते छह साल में पांच लोगों ने रास्ते पर दम तोड़ दिया।

घर पर ही होता है जीवन और मौत से संघर्ष
कनार के बीमारों और घायलों के लिए सड़क न होने से घर पर ही जीवन और मौत से संघर्ष करना मजबूरी है। बीते वर्ष अगस्त में गांव में 50 वर्षीय देवकी देवी बिजली गिरने से घायल हो गईं वहीं लंबे समय से सांस की दिक्कत से जूझ रहे 58 वर्षीय मान सिंह की तबीयत अधिक बिगड़ गई। गांव तक सड़क न होने से भारी बारिश, दरकती पहाड़ी, उफनाए गधेरों और बदहाल रास्ते पर पैदल सफर कर उन्हें अस्पताल पहुंचना असंभव था। खराब मौसम में हेलिकॉप्टर भी उड़ान नहीं भर सका। ऐसे में घायल और बीमारों के लिए घर पर ही जीवन और मौत से संघर्ष करना मजबूरी बन गया। चौथे दिन मौसम खुला तो तब जाकर दोनों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर जिला अस्पताल पहुंचाया जा सका और उनकी जान बचाई जा सकी। वहीं वर्ष 2020 में गांव की 45 वर्षीय महिला पहाड़ी से गिरने से घायल हो गई। ग्रामीण उन्हें डोली से 15 किलोमीटर पैदल बरम तक लाए इसमें चार घंटे लग गए। इलाज में देरी के कारण उनकी मौत हो गई। 

दूरस्थ गांव कनार के ग्रामीणों के बीमार पड़ने की सूचना मिली थी। स्वास्थ्य कर्मियों को हेलीकॉप्टर से भेजकर सभी बीमारों का इलाज किया और अन्य का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। ग्राम सभा को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए इमरजेंसी फर्स्ट ऐड किट भी उपलब्ध कराई गई है। -डॉ. जेएस चुफाल, सीएमओ, पिथौरागढ़

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें