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उच्च हिमालयी गांवों में प्रवास पर जा सकेंगे ग्रामीण

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माइग्रेशन पर उच्च हिमालयी क्षेत्र को जाते सीमांत के लोग(फाइल फोटो)। - फोटो : PITHORAGARH
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दारमा और व्यास घाटी के गांवों में पारंपरिक प्रवास को लेकर संशय दूर हो गया है। इन घाटियों के लोग अब गांवों को जा सकते हैं।
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लॉकडाउन के बाद दारमा के 14 और व्यास के सात गांवों के लोग अपने उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित अपने मूल गांवों की ओर जाने का इंतजार कर रहे थे। एक अप्रैल से होने वाला पारंपरिक माइग्रेशन में लॉकडाउन के चलते 20 दिन का विलंब हो गया है।
इस कारण उच्च हिमालयी क्षेत्रों में याक, झुप्पू, हिमालयी गाय आदि जानवर गर्मी के चलते काफी परेशान हो रहे थे। विगत दिनों भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष कृष्णा गर्ब्याल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर माइग्रेशन पर जाने की अनुमति देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि माइग्रेशन में लोग छह माह के लिए उच्च हिमालयी गांवों में जाते हैं। ग्रामीण अपने जानवरों को लेकर गांवों में जाते हैं। इससे सामाजिक दूरी का पालन भी स्वत: होता है।
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उन्होंने कहा था कि मूल गांवों में जाने से ग्रामीण खेतीबाड़ी का कार्य करते हैं। मई के बाद फसलों को बोने का समय नहीं रहता है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी अनिल कुमार शुक्ला ने बताया कि लोग खेतीबाड़ी और पशुपालन के लिए अपने मूल गांवों में जा रहे हैं। इसलिए वह लोग पहले की तरह ही जा सकते हैं।
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इससे ग्रामीणों में उत्साह है। ग्रामीणों का कहना है कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। क्षेत्र प्रमुख धन सिंह धामी, पालिकाध्यक्ष राजेश्वरी देवी, भूपेंद्र थापा, पूर्व चेयरमैन अशोक नबियाल, रुकुम बिष्ट, राजू नेगी, वीरेंद्र नपलच्याल, योगेश गर्ब्याल, लक्ष्मी परमार, उर्मिला कुटियाल ने मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शमशेर सत्याल का आभार जताया है।
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