मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। लुमती-घरूड़ी में गोरी नदी पर गरारी नहीं होने के खामियाजा लोगों को हर रोज भुगतना पड़ रहा है। गरारी के नहीं होने से घरूड़ी निवासी घायल वृद्धा के लिए ग्रामीणों को ही ‘एंबुलेंस’ बनना पड़ा। ग्रामीणों ने बुजुर्ग को नौ किमी पीठ पर ढोकर बरम अस्पताल पहुंचाया।
मंगलवार को घरूड़ी निवासी हीरा देवी (65) पत्नी स्व. अमर सिंह मवेशियों को लेकर जंगल गई थी। जंगल में पत्थरों की चपेट में आने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गई। हाथ टूटने के साथ ही उनको अंदरूनी चोटें भी आई थीं। 18 अक्तूबर को भारी बारिश में लुमती-घरूड़ी में गोरी नदी पर बनी गरारी बहने और पैदल रास्ते ध्वस्त होने के कारण लोगों ने महिला को नौ किमी पीठ पर ढोकर बरम अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
ग्राम प्रधान मुन्नी देवी का कहना है कि लंबे समय से नई गरारी लगाने और आपदा में ध्वस्त पैदल रास्तों को ठीक करने की मांग की जा रही है। इसके बाद भी उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने गरारी के नहीं बनने तक एक अस्थायी लकड़ी के पुल के निर्माण की मांग की है, जिससे लोग आसानी से आवाजाही कर सकें।
बीमार को डोली में ले जा रहे लोगों का रास्तों ने लिया इम्तहान
मदकोट(पिथौरागढ़)। आपदाग्रस्त क्षेत्र गोल्फा गांव में 51 वर्षीय बुजुर्ग जय सिंह पिछले एक सप्ताह से बीमार चल रहे थे। सोमवार रात की उनकी तबीयत अधिक खराब हो गई। इसके बाद मंगलवार को परिजनों ने उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाना बेहतर समझा। वह डोली में बुजुर्ग को लेेकर सड़क के लिए निकल पड़े। सुबह छह बजे दो बेटों समेत नौ लोग बुजुर्ग को लेकर फर्पकोट पहुंचे। इसके बाद यहां से बीमार को ट्राली से गोरी नदी पार कराकर मोतीघाट पहुंचाया, जहां से बीमार के बेटे राजू फर्स्वाण और मुकेश फर्स्वाण वाहन बुक कराकर 120 किमी दूर जिला अस्पताल के लिए रवाना हुए। ग्रामीण भुप्पी बथ्याल ने बताया कि फर्पकोट और मोती घाट के बीच बना स्थायी पुल 17 अक्तूबर की बारिश में बह गया था। पुल का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
21 साल में सरकारें बदलीं लेकिन हालात जस के तस
पिथौरागढ़। जिले में राज्य स्थापना दिवस का जश्न मनाया जा रहा है लेकिन आज भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों के हालात बेहद खराब है। स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त तो हुईं लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। 21 सालों में सरकारें बदलीं लेकिन पहाड़ के हालात में ज्यादा परिवर्तन नहीं आया। यहां आज भी गांव तक एंबुलेंस पहुंचा सपना है, ग्रामीण ही एंबुलेंस बन डोली के सहारे बीमारों को सड़क तक लाते हैं। जिले के मुनस्यारी, धारचूला, कनालीछीना, मूनाकोट, विण, डीडीहाट, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग की 690 ग्राम पंचायतों को समग्र विकास का इंतजार हैं। कई गांव ऐसे हैं, जहां आज भी ग्रामीणों को पैदल चलकर ही सड़क तक पहुंचना पड़ता है।
बुजुर्ग महिला को पीठ में डोहकर अस्पताल पहुंचाते ग्रामीण।- फोटो : PITHORAGARH