पिथौरागढ़। सिविल जज (सीनियर डिविजन) आरती सरोहा की अदालत ने फर्जी स्थायी निवास प्रमाणपत्र के मामले की सुनवाई करते हुए दोषियों को दो वर्ष के सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 19 सितंबर 2019 को रोहित कुमार और बबलू मीना ने वादी गोपाल सिंह को जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दिया था। इस दौरान उन्होंने उनसे कागजात प्रस्तुत करने को कहा। इस पर उन्होंने अपना स्थायी निवास प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। जांच के दौरान स्थायी निवास प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। तहरीर के आधार पर थाना कोतवाली पिथौरागढ़ में दोनों के खिलाफ धारा 420,468 और 471 भारतीय दंड संहिता 1860 मुकदमा दर्ज किया गया। यह मामला न्यायालय में चला। बुधवार को दोनों पक्षों को सुनने के बाद सिविल जज सीनियर डिविजन आरती सरोहा ने रोहित कुमार और बबलू मीना को धारा 468 भादसं 1860 के आरोप से दोष मुक्त किया। धारा 420 एवं 471 भादसं 1860 के अपराध के लिए दोनों अभियुक्तों को दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर दो माह का साधारण कारावास की सजा भुगतना होगा।