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सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण टनकपुर-जौलजीबी सड़क को लेकर क्यों गंभीर नहीं है सरकार

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निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीबी सड़क। - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। सीमांत की दूसरी लाइफ लाइन 135 किलोमीटर लंबी टनकपुर-जौलजीबी सड़क के निर्माण को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। वर्ष 2017 से बन रही सड़क का अभी आधा काम भी नहीं हुआ है। यह सड़क बारहमासी सड़क के बंद होने पर दूसरे विकल्प के तौर पर इस्तेमाल की जा सकती है।
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स्वांला के पास मलबा आने से बारहमासी सड़क 11 दिन बंद रही। इससे सीमांत जिले के व्यापारियों का दो अरब का कारोबार तो प्रभावित हुआ ही, जिले में जरूरी सामान की भी किल्लत हो गई।
पीआईयू (परियोजना क्रियान्वयन इकाई) लोनिवि ठुलीगाड़ ने 135.475 किमी लंबी टनकपुर-जौलजीबी सड़क के निर्माण के लिए वर्ष 2013 में सरकार को करीब 873 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था।
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वर्ष 2014 में सड़क निर्माण के लिए सरकार ने 252.81करोड़ की स्वीकृति दी। वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद पंचेश्वर बांध निर्माण की कार्रवाई आगे बढ़ी।
बांध का आकर निश्चित नहीं होने के कारण सरकार ने पीआईयू को टनकपुर से रूपालीगाड़ तक की 55 किमी सड़क को टू-लेन बनाने के लिए कहा। वर्तमान में पीआईयू ने पहले पैकेज में 55 किमी की इस सड़क पर ठुलीगाड़ से चूका तक करीब 20 किमी में डामरीकरण का काम पूरा कर लिया है।
इस सड़क में भवानी नाले में 90 मीटर, लादीगाड़ में 24 मीटर और गौजी नाले में 24 मीटर के पुल निर्माणाधीन हैं। करीब 35 किमी सड़क में कटिंग, सुरक्षा दीवार, सोलिंग आदि का कार्य किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि पीआईयू चार साल में 55 किमी सड़क का निर्माण पूरा नहीं कर पाई है। इससे लगता है कि सरकार और कार्यदायी संस्था सड़क के लिए गंभीर नहीं है।
पंचेश्वर डैम की वजह से रुपालीगाड़ से बलतड़ी तक बनेगी सिंगल लेन सड़क
पिथौरागढ़। सड़क निर्माण में पंचेश्वर डैम के आड़े आने के बाद सरकार ने पीआईयू को रुपालीगाड़ से बलतड़ी तक सिंगल लेन सड़क बनाने का प्रस्ताव भेजने के लिए कहा था। पीआईयू ने 203 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा, जिसे अभी स्वीकृति नहीं मिली है। बलतड़ी से जौलजीबी तक पहले से बनी सिंगल लेन सड़क को टू-लेन सड़क बनाने के लिए भेजे गए करीब 600 करोड़ के प्रस्ताव को भी स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
टीजे रोड बनने से चीन और नेपाल सीमा पर मजबूत होगा सुरक्षा तंत्र
पिथौरागढ़। अभी सेना को सीमा तक पहुंचने के लिए पिथौरागढ़ से टनकपुर करीब 150 किमी की यात्रा करनी पड़ती है। यहां से धारचूला के लिए 90 और फिर लिपुलेख पहुंचने के लिए 90 किमी दुर्गम रास्तों पर गाड़ी और पैदल आवाजाही करनी पड़ती है। टनकपुर-जौलजीबी मार्ग के बनने के बाद जवान सीधे 185 किमी की यात्रा कर धारचूला पहुंच सकते हैं। इसके बाद उन्हें चीन सीमा तक पहुंचने के लिए 90 किमी की ही यात्रा करनी पड़ेगी। नेपाल सीमा से सटे सैकड़ों गांवों को भी इसका लाभ मिलेगा। बारहमासी सड़क के बंद होने पर वाहन टनकपुर से झूलाघाट और इसके बाद आसानी से पिथौरागढ़ आ सकते हैं।
टनकपुर से रुपालीगाड़ तक 55 किमी टू-लेन सड़क का कार्य किया जा रहा है। तीन पुल निर्माणाधीन हैं। रुपालीगाड़ से बलतड़ी के लिए प्रस्तावित सिंगल लेन और बलतड़ी से जौलजीबी तक की टू-लेन सड़क के लिए स्वीकृति नहीं मिल पाई है। टनकपुर से रुपालीगाड़ तक जल्द सड़क निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। - बीएस पोखरिया, एएई, पीआईयू, लोनिवि ठुलीगाड़।
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