पिथौरागढ़। बेहतर उपचार के दावे कर सीमांत जिले में खोले गए बेस अस्पताल में विशेषज्ञों की तैनाती करना चुनौती बन गया है। दो साल में चार बार साक्षात्कार के बाद भी यहां सिर्फ दो विशेषज्ञों की तैनाती हो सकी है। किसी तरह बेहोशी के डॉक्टर की तैनाती हुई, लेकिन सर्जन का पता नहीं है। ऐसे में यहां पहुंचे मरीज ऑपरेशन और अन्य उपचार के लिए हायर सेंटर की दौड़ लगाने के लिए मजबूर हैं।
जिले के मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार के लिए 64 करोड़ की लागत से बेस अस्पताल खोला गया। दो साल पूर्व इसका संचालन भी हुआ, लेकिन विशेषज्ञ न होने से इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा।
बेस में फिजिशियन, सर्जन, आई सर्जन, ईएनटी सर्जन, महिला रोग, बाल रोग विशेषज्ञ सहित 37 विशेषज्ञों की तैनाती होनी है। दो साल में इसके लिए कई बार साक्षात्कार हुए, लेकिन एनेस्थेटिक और डेंटल सर्जन के अलावा कोई विशेषज्ञ नहीं मिल सका। बीते दिनों बेस अस्पताल में विशेषज्ञों की तैनाती के लिए हल्द्वानी में चौथी बार साक्षात्कार किया गया। इस बार भी चिकित्सा शिक्षा विभाग को निराश होना पड़ा है।
हैरानी है कि यहां बेहोशी के डॉक्टर तैनात हैं लेकिन ऑपरेशन के लिए सर्जन नहीं मिल सके। ऐसे में बेहोशी के डॉक्टर की तैनाती के भी कोई मायने नहीं रह गए। संवाद
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ओटी का भी नहीं हो सका निर्माण
पिथौरागढ़। बेस अस्पताल में संचालन के दो साल बाद भी ओटी का निर्माण नहीं हो सका है। ओटी में अब भी मशीनें स्थापित नहीं हो पाई हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग सर्जन सहित अन्य विशेषज्ञों की तैनाती के लिए साक्षात्कार कर रहा है। यदि सर्जन सहित अन्य विशेषज्ञ मिल भी गए तो बगैर ओटी के जनरल ऑपरेशन, सिजेरियन सहित अन्य ऑपरेशन कैसे और कहां होंगे, यह बड़ा सवाल है। संवाद
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजय आर्य का कहना है कि बेस अस्पताल में विशेषज्ञों की तैनाती के लिए हल्द्वानी में साक्षात्कार हुए। एक भी विशेषज्ञ अस्पताल को नहीं मिला है। विशेषज्ञों की तैनाती के प्रयास जारी हैं।