कनालीछीना विकासखंड मुख्यालय में बने आपदा संसाधन केंद्र में लटके ताले। संवाद
पिथौरागढ़। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील सीमांत जिले में सिस्टम आपदा के प्रति संवेदनहीन है। सात साल से आपदा संसाधन केंद्र में लटके ताले इसका प्रमाण है। कनालीछीना विकासखंड मुख्यालय में 20 लाख से आपदा संसाधन केंद्र का निर्माण किया गया, लेकिन इसके संचालन नहीं हुआ और इसके प्रयास भी नहीं हुए। संचालन न होने से केंद्र का भवन जर्जर हो गया है।
नेपाल और चीन सीमा से लगे विकासखंडों के विकास के लिए संचालित बीएडीपी योजना के तहत कनालीछीना विकासखंड मुख्यालय में 20 लाख की लागत से 2017 में आपदा संसाधन केंद्र का निर्माण किया गया था।
केंद्र में स्थायी आपदा कंट्रोल रूम स्थापित करने के साथ ही आपदा के दौरान प्रभावित लोगों को इसमें ठहराया जाना था। सात साल बाद भी इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है।
बीडीओ कार्यालय से सिर्फ 20 मीटर दूर बने इस केंद्र के दरवाजे अब तक नहीं खुल सके हैं। संचालन न होने से लाखों की लागत से बना भवन जर्जर हो गया है और आपदाकाल में तहसील कार्यालय के एक कक्ष में अस्थायी कंट्रोल रूम संचालित कर औपचारिकता निभाई जा रही है। संवाद
अब तक नहीं हो सका केंद्र का हस्तांतरण
पिथौरागढ़। कार्यदायी संस्था ने एक साल के भीतर आपदा संसाधन केंद्र का निर्माण पूरा कर लिया। विकासखंड कार्यालय को हस्तांतरण के लिए भी पत्राचार किया। हैरानी है कि आज तक यह केंद्र हस्तांतरित नहीं हो सका है। बगैर हस्तांतरण के इसका संचालन होना मुश्किल है और सालों से बंद भवन जर्जर हो रहा है।
कोट
- आपदा संसाधन केंद्र का हस्तांतरण होना है। आपदा प्रबंधन विभाग इसका संचालन करेगा। हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कर इसके संचालन के प्रयास होंगे। - जगदीश प्रसाद, खंड विकास अधिकारी, कनालीछीना।