बंगापानी। बीते बृहस्पतिवार मेतली निवासी 14 साल की दीक्षा और भटबट्टा के 61 वर्षीय हरमल सिंह का स्वास्थ्य बिगड़ गया। चलने में असमर्थ दोनों बीमारों को रेस्क्यू करने के लिए हेलीकॉप्टर की मांग की गई। हेलीकॉप्टर मेतली तक पहुंचा लेकिन हेलीपैड पर उतर नहीं सका। ऐसे में ग्रामीणों ने दोनों मरीजों को डोली के सहारे 12 से 14 किमी दूर मुख्य सड़क तक पहुंचाया तब जाकर वे अस्पताल पहुंच सके।
मेतली में हेलीपैड निर्माण में बरती गई लापरवाही की मार क्षेत्र के लोग सह रहे हैं। भारी भरकम धनराशि खर्च कर बिजली लाइन के ठीक नीचे हेलीपैड बना दिया गया। अब हेलीपैड के ऊपर गुजर रही लाइन की वजह से हेलीकॉप्टर नहीं उतर पा रहा है। इसी वजह से मरीज को रेस्क्यू करने आया हेलीकॉप्टर भी यहां नहीं उतर सका। लोगों को कहना है कि इस तरह के हेलीपैड का निर्माण करना कतई ठीक नहीं है जो आपात स्थिति में लोगों के काम न आ सके।
कोट
हेलीपैड का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। ऊपर बिजली लाइन गुजर रही है इससे हेलीकॉप्टर नहीं उतर पा रहा है। लाइन और खंबा हटाने के लिए यूपीसीएल को पत्राचार किया गया है। उम्मीद है जल्द लाइन और खंभा हटेगा। - कविंद्र सिंह फिरमाल, जेई, मनरेगा, धारचूला।
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35 लाख के हेलीपैड पर नहीं उतर पा रहा हेलीकॉप्टर, बीमारों के लिए सिर्फ डोली ही सहारा
-बंगापानी क्षेत्र के मेतली में बने इस हेलीपैड का मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगापानी (पिथौरागढ़)। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील सीमांत और दुर्गम जिले में हेलीकॉप्टर से बीमारों, गर्भवतियों को रेस्क्यू करने के खूब दावे हो रहे हैं जो धरातल पर बेअसर हैं। बंगापानी क्षेत्र के दूरस्थ गांव मेतली में 35 लाख के हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर नहीं उतर पा रहा है। ऐसे में बीमारों और गर्भवतियों को बदहाल रास्तों से डोली के सहारे मीलों दूर चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ रहा है। समय पर अस्पताल न पहुंचने से उनकी जान को खतरा हो रहा है।
बंगापानी के दूरस्थ गांव मेतली में दो साल पूर्व 35 लाख रुपये से हेलीपैड का निर्माण हुआ। सड़क से दूर मेतली और इसके आसपास के मरीजों और गर्भवतियों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर उतारना इसका उद्देश्य था। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी अब तक इस हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर नहीं उतर पा रहा है। इसकी मार क्षेत्र के मरीज, गर्भवतियां और आम लोग झेल रहे हैं। हेलीकॉप्टर सेवा न मिलने से बीमारों को उपचार के लिए डोली के सहारे बदहाल रास्तों पर खतरे के बीच 12 किमी दूर मुख्य सड़क तक पहुंचाना ग्रामीणों की नियति बन गया है। बीमार तड़पते हुए हेलीकॉप्टर उतरने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनका यह इंतजार कब खत्म होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है। संवाद