टनकपुर (चंपावत)। कैलाश मानसरोवर यात्रियों के चौथे दल टनकपुर के टीआरसी पहुंचने पर उत्तराखंड के पारंपरिक रीति रिवाज से तिलक और फूल मालाओं से स्वागत किया गया। दल में 50 सदस्य शामिल हैंं। शिव भक्त भोले के जयकारों के साथ वाहनों से उतरे और फिर भजन और देवभूमि की लोक संस्कृति में रंग गए। शुक्रवार की सुबह यात्रियों का दल धारचूला के लिए रवाना होगा।
बृहस्पतिवार की शाम चौथे दल में शामिल शिवभक्त लाइजनिंग अधिकारी हरियाणा के सुमित भाटिया, बिहार के लक्ष्मी चंद्र के साथ टीआरसी पहुंचे। दोनों लाइजनिंग अधिकारियों ने बताया कि दल के 50 सदस्यों में 33 पुरुष, 17 महिलाएं शामिल हैं। दल में चौथी बार शिवधाम जा रहीं हिमाचल की डॉ. मंजुला बेहद उत्साहित नजर आईं। उन्होंने कहा कि महादेव ने फिर बुलाया तो वह चली आईं। हिमाचल हेल्थ विभाग से सेवानिवृत्त डॉ. मंजुला ने कहा कि वर्ष 2011, 2017, 2019 के बाद चौथी बार यात्रा पर जा रही हैं। कुमाऊंनी लोकगीतों में शिव भक्त जमकर थिरकते रहे और बम भोले के जयकारों की भी गूंज रही। केएमवीएन के टीआरसी मैनेजर मनोज कुमार ने बताया कि दल शुक्रवार की सुबह धारचूला के लिए रवाना होगा। इस बीच हरेला पर्व पर शिवभक्तों ने टीआरसी परिसर में मां पूर्णागिरि पर्यावरण संरक्षण समिति की अध्यक्ष दीपा देवी की पहल पर आयोजित कार्यक्रम में पौध रोपकर हरेला मनाया।
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परदादा के दादा की फोटो भी साथ लेकर आए हैं कर्नाटक के बुजुर्ग यात्री
टनकपुर (चंपावत)। कैलाश मानसरोवर यात्रा के चौथे दल में शामिल कर्नाटक के बेलगाम के 70 वर्षीय राजनारायण इकलौती पुत्री समहिता के साथ भक्ति में डूबे नजर आए। उन्होंने बताया कि उनके परदादा के दादा राज सुब्रह्मण्यम वर्ष 1958 में कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर चुके हैं। वह मानसरोवर झील के किनारे उनकी पुरानी फोटो भी साथ लाए हैं। वह कर्नाटक के एक प्रमुख उद्योग से सेवानिवृत्त हैं। उनकी पुत्री समहिता ने बताया कि वह होम डेकोर प्रोडक्ट का व्यापार बेलगाम में करती हैं। अपने पिता की इकलौती पुत्री हैं और पिता का हाथ पकड़कर शिवधाम चल पड़ी हैं। अब लौट कर आएंगी तो वहां पावन झील के किनारे फोटो खिचवाएंगे और उसे भी अपने रिकॉर्ड में रखेंगी जिससे आने वाली पीढ़ी भी हमारी तरह अपने पुरखों से प्रेरणा लेगी।