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इस साल भारतीय बाजार और मेलों में नहीं मिलेगा तिब्बती सामान

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चीन स्थित तकलाकोट मंडी। - फोटो : PITHORAGARH
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धारचूला (पिथौरागढ़)। कोरोना महामारी और चीन के साथ चल रहे विवाद के कारण इस साल भारत-चीन व्यापार नहीं हो सका। इससे सीमांत के व्यापारियों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। भारत-चीन व्यापार न होने से इस साल भारतीय बाजार और ऐतिहासिक मेलों में तिब्बती सामान नहीं मिल पाएगा। कच्चे ऊन का आयात न होने से ऊनी कपड़ों का कारोबार भी प्रभावित होगा।
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लिपुलेख पास से कैलास मानसरोवर यात्रा के साथ ही हर साल भारत-चीन व्यापार होता था। भारत से व्यापारी मुख्य रूप से सौंदर्य प्रसाधन, गुड़, मिश्री, तंबाकू आदि सामान लेकर तकलाकोट मंडी जाते थे और वहां से ऊन, ऊनी कंबल, याक की पूंछ, जैकेट और जूते लेकर भारत आते थे। तिब्बत में निर्मित जूते, जैकेट और ऊनी गर्म कपड़ों की भारतीय बाजार में अच्छी मांग रहती है। याक की पूंछ का धार्मिक महत्व होने से इसकी भी बहुत मांग है। तिब्बती सामान का सबसे अधिक कारोबार जौलजीबी और बागेश्वर के उत्तरायणी मेले में होता है, लेकिन इस बार भारतीय बाजार और इन ऐतिहासिक मेलों में तिब्बती सामान नहीं मिलेगा। व्यापार न होने से सीमांत के व्यापारियों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है। सीमांत के पांच सौ से अधिक परिवार तिब्बत से लाए गए ऊन को कातकर गर्म कपड़े तैयार करते थे। इस बार ऊन न मिलने से इन परिवारों के सामने भी आर्थिक संकट गहराएगा।
1962 की लड़ाई के बाद 30 साल बंद रहा व्यापार
धारचूला। इससे पूर्व 1962 की लड़ाई के कारण चीन के साथ लिपुलेख दर्रे से होने वाला व्यापार 30 साल तक बंद रहा। हालात सामान्य होने पर 1992 में व्यापार दोबारा शुरू हुआ। भारत-चीन व्यापार समिति के संरक्षक पदम रायपा, उपाध्यक्ष दिनेश गुंज्याल और महासचिव दौलत सिंह रायपा ने बताया कि 30 साल तक भारत का व्यापार चीन के साथ बंद रहा, जबकि नेपाल से व्यापार चलता रहा। उपाध्यक्ष दिनेश गुंज्याल ने बताया कि इस वर्ष व्यापार बंद होने से सीमांत के लगभग 250 से अधिक व्यापारियों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। भारत चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली ने बताया कि प्रतिवर्ष लगभग 250 व्यापारी और हेल्पर चीन जाते हैं। लगभग चार से पांच करोड़ रुपये के सामान का आयात-निर्यात होता है। इस साल सभी व्यापारी और हेल्पर बेरोजगार रह गए।
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यातायात नहीं होने से कभी गुंजी नहीं आए चीनी व्यापारी
धारचूला। भारत-चीन व्यापार में केवल भारतीय व्यापारी ही चीन की मंडी तकलाकोट जाते रहे हैं। व्यापार के लिए भारत ने 10 हजार फीट की ऊंचाई पर गुंजी में मंडी का निर्माण किया था, लेकिन भारतीय क्षेत्र में यातायात की सुविधा न होने से चीनी व्यापारियों ने कभी यहां का रुख नहीं किया। भारतीय मंडी गुंजी में व्यापारियों की सुविधा के लिए कस्टम कार्यालय, भारतीय स्टेट बैंक की अस्थायी शाखा खोली जाती है।
भारत चीन व्यापार में प्रति वर्ष 300 ट्रेड पास मंगाए जाते हैं। इस वर्ष कोरोना महामारी और सीमा में चल रहे विवाद के कारण विदेश मंत्रालय से व्यापार की अनुमति नहीं मिली। पिछले साल 265 ट्रेड पास जारी हुए थे। 1.92 करोड़ का आयात और 1.26 करोड़ रुपये के सामान का निर्यात हुआ था।
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- अनिल कुमार शुक्ला, ट्रेड अधिकारी एवं उपजिलाधिकारी धारचूला।
विगत चार वर्षों के भारत-चीन व्यापार का आयात-निर्यात
वर्ष - जारी पास - आयात - निर्यात
2016 - 195 - 5.21 करोड़ - 75.95 लाख
2017 - 195 - 7.34 करोड़ - 86.42 लाख
2018 - 244 - 5.34 करोड़ - 86.82 लाख
2019 - 265 - 1.91 करोड़ - 1.25 करोड़
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