सीएम की घोषणा के बाद भी जिला अस्पताल में टेली रेडियोलॉजी की सेवा नहीं मिल पा रही है। इससे मरीजों का पूरा परीक्षण तक नहीं हो पा रहा है।
उन्हें इलाज के लिए स्थानीय निजी अस्पतालों के साथ ही मैदानी शहरों की ओर दौड़ लगानी पड़ रही है।
राज्य मेें स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार ने टेली रेडियोलॉजी सेंटर खोलने की योजना बनाई है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग ने एक निजी कंपनी से एमओयू साइन किया गया है। कई मामलों में सरकारी अस्पताल के चिकित्सक विशेषज्ञ के अभाव में मरीज का पूरा परीक्षण नहीं कर पाते हैं। इन मामलों में निजी कंपनी को विशेषज्ञ से परीक्षण के बाद अस्पतालों में रेडियोलॉजी जांचों की ऑनलाइन रिपोर्ट देनी थी। इससे मरीज को घर बैठे ही रोग की सही जानकारी के साथ इलाज भी मिलता। योजना के तहत जिला अस्पताल में टेली रेडियोलॉजी सेंटर बनाया गया है, लेकिन यहां मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल से निजी कंपनी की वेबसाइट पर मरीजों के रेडियोलॉजी के डिजिटल एक्सरे आदि अपलोड किए जा रहे हैं, लेकिन अस्पताल को इसकी जांच रिपोर्ट नहीं मिल रही।
जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं
जिला अस्पताल में स्थायी रेडियोलॉजिस्ट न होने से भी मरीजों को टेली रेडियोलॉजी सेवा का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट मेडिकल अवकाश पर हैं। नतीजतन अस्पताल में अल्ट्रासाउंड का काम ठप पड़ा है। जिला अस्पताल चंपावत से एक दिन के लिए रेडियोलॉजिस्ट बुलाकर अल्ट्रासाउंड कराए जा रहे हैं, लेकिन मरीजों की भारी संख्या को देखते हुए अस्थायी व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। मजबूरन रोजाना कई मरीजों को निजी अस्पतालों और अल्ट्रासाउंड सेंटर की शरण लेनी पड़ रही है।
कोट
अस्पताल से रेडियोलॉजी का डिजिटल डाटा संबंधित कंपनी को अपलोड किया जा रहा है, लेकिन इनकी जांच रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। मुख्यालय को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है। -डॉ एचएस खड़ायत, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल