पिथौरागढ़। निर्भया के दोषियों को सजा में हो रही देरी पर अमर उजाला कार्यालय में बुधवार को आयोजित संवाद में महिलाओं ने बेबाकी से अपनी बात रखी। इस दौरान महिलाओं ने कहा कि बार-बार सजा टलने से अपराधियों के हौसले और अधिक बुलंद हो जाते हैं। दरिंदों ने जो बर्बरता निर्भया के साथ की फिर कोई ऐसी हिमाकत न करें इसके लिए जरूरी है कि निर्भया के दोषियों को हर हाल में फांसी दी जाए। उनका कहना था कि महिला के साथ हिंसा और जघन्य अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कानून बने जिससे गुनहगारों को जल्द सजा मिल सके। महिलाओं ने कहा कि माता-पिता को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाएं।
कानून सभी को देता है अवसर
कानून की अपनी प्रक्रिया होती है। किसी निरपराध व्यक्ति को सजा न मिले, इसको देखते हुए नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया चलती है। इन्हीं नियमों के तहत आरोपी को भी अवसर मिलता है। निर्भया कांड के दोषियों को फांसी जरूर होगी। लंबे समय तक अपराधी फांसी की सजा से बच नहीं सकेंगे। - ललिता पुजारा, अधिवक्ता।
न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार करना चाहिए
कानून में सभी को अवसर दिए गए हैं। उसका फायदा कई बार अपराधी उठाते हैं। निर्भया मामले में अपराधी चाहे कितनी पैंतरेबाजी कर लें बच नहीं सकेंगे। जिस दिन वे सारे हथकंडे अपना लेंगे उस दिन निर्भया के गुनहगारों को फांसी की सजा होगी। - गुंजन बिष्ट, अधिवक्ता।
कानून में संशोधन जरूरी
निर्भया के गुनहगारों को फांसी की सजा में देरी ठीक नहीं है। बार-बार फांसी टलने से निर्भया के माता-पिता सहित अन्य परिजनों की पीड़ा और अधिक बढ़ रही है। इस तरह के मामलों में दोषियों को सख्त और शीघ्र सजा का प्रावधान हो इसके लिए कानून में संशोधन होना चाहिए। -लक्ष्मी भट्ट।
बचने नहीं चाहिए मानवता को शर्मसार करने वाले
निर्भया कांडा ऐसा जघन्य अपराध था, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। मानवता शर्मसार हो गई थी। अपराधी कानूनी पेच लगाकर सजा से बचना चाह रहे हैं। इस तरह के मामलों में दोष सिद्ध होने पर जल्द से जल्द सजा देने का प्रावधान होना चाहिए। -भावना नगरकोटी, सभासद।
जल्दी फांसी पर लटकाना जरूरी
निर्भया के दोषियों को फांसी देने के मामले में लंबी प्रक्रिया चली है। दोष साबित होने के बाद दोषियों को छह माह के भीतर फांसी पर लटकाया जाना चाहिए ताकि फिर कोई इस तरह के जघन्य अपराध न करे। निर्भया की मां की पीड़ा को समझने की जरूरत है। -मीनू बिष्ट।
ऐसे अपराध क्यों हो रहे हैं, यह सोचना जरूरी
निर्भया के साथ जो दरिंदगी हुई उसने समाज को झकझोर दिया था। सजा बाद की प्रक्रिया है। सभी को यह समझने की जरूरत है कि आखिर इस तरह के अपराध क्यों हो रहे हैं। दोषियों की फांसी या एनकाउंटर पर नहीं बल्कि समाज में दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध क्यों हो रहे हैं आज इस पर भी बहस करने की जरूरत है। -नूतन, छात्रा।
सश्रम कारावास की सजा मिलनी चाहिए
इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि हमारा समाज किस ओर जा रहा है। केवल फांसी की सजा देने से ही निर्भया जैसे मामले नहीं रुकेंगे। इस तरह के घृणित अपराधियों को सश्रम कारावास की सजा देनी चाहिए ताकि ताउम्र अपराधी हर क्षण मरता रहे। शीला पुनेठा।
ऐसी व्यवस्था हो कि अपराध ही न हों
निर्भया कांड के बाद भी देश में महिलाओं के साथ जघन्य अपराधों का क्रम रुका नहीं है। महिलाएं आज भी स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं। इस तरह के मामले रोकने के लिए कानून को सख्त बनाया जाना जरूरी है। ऐसी व्यवस्था हो कि इस तरह के अपराधों की पुनरावृत्ति न हो। - अंकिता जोशी।
कानून को सख्त बनाया जाए
हमारे देश का संविधान और कानून लचीला है। इसका फायदा अपराधी भी उठाते हैं। कानून को सख्त बनाए जाने की जरूरत है। अपराध रोकने और अपराधियों को सजा देने के लिए कानून बनाया गया है। कानून को और अधिक सख्त बनाने के लिए बदलाव होना चाहिए। - मनीषा।
समाज में महिलाओं के लिए हर जटिल नियम
महिलाओं ने हमेशा अत्याचार सहे हैं। महिलाओं को समाज में तमाम जटिल नियमों से जूझना पड़ता है। महिलाओं को कभी दहेज के लिए मार दिया जाता है तो कभी उसके साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी जाती है। सख्त कानून बनाकर यह सब रोका जाना चाहिए। - सोनल।
निर्भया के दोषियों को शीघ्र मिले फांसी
नर्भया के साथ जिस तरह की दरिंदगी की गई वह अक्षम्य है। निर्भया के गुनहगारों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। उसकी मां का दर्द सभी नहीं समझ सकते हैं। आए दिन लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं। महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। -रवीना।
नहीं बचने चाहिए निर्भया के गुनहगार
निर्भया के गुनहगार बचने नहीं चाहिए, जो अपराध उन्होंने किया है उसे माफ नहीं किया जा सकता है। दोषियों को फांसी की सजा में हो रही देरी से लोगों में गुस्सा है। इस तरह के अपराध करने वाले दोषियों को पब्लिक के बीच में सजा देनी चाहिए ताकि लोगों में ऐसा करने से पहले भय पैदा हो। -ज्योति सिरोला।
दो माह के भीतर फांसी पर लटकाने का हो नियम
घटना को सात साल का समय बीत गया है। कानूनी पैंतरेबाजी का इस्तेमाल कर अपराधी बचने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह के मामलों में ऐसा कानून बनना चाहिए, जिससे दोषियों को दो माह के भीतर फांसी पर लटकाने का प्रावधान हो ताकि कोई भी अपराधी कानूनी पैंतरेबाजी इस्तेमाल न कर सकें। -रेखा चौहान।
कोई भी हथकंडा दोषियों को नहीं बचा सकता
कानून की एक प्रक्रिया होती है। कानून दोनों पक्षों को सुनने के बाद सजा सुनाता है। इस प्रक्रिया का कई बार अपराधी गलत फायदा उठाने का प्रयास करते हैं। निर्भया के मामले में दोषियों को फांसी की सजा दी गई है। दोषी कोई भी हथकंडे अपना लें इस सजा से बच नहीं सकते हैं। -रितु गुप्ता, अधिवक्ता।
कानूूनी प्रक्रिया में सुधार की जरूरत
अपराधी को सजा देने के लिए कानून बना है। कानून में जो मौजूदा नियम हैं, अपराधी उनका फायदा उठाते हैं। कानूनी प्रक्रिया को सुधारने की जरूरत है। अपराध कम करने के लिए नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाना जरूरी है। नैतिकता लोगों को अपराध करने से रोकती है। - नेहा बिष्ट।
कठोर कानून बनाया जाना चाहिए
महिलाओं के साथ दुष्कर्म और फिर हत्या जैसे मामले हमें भीतर तक झकझोर देते हैं। इस तरह के मामलों को रोकने के लिए कठोर कानून बनाने की जरूरत है। अपराधियों में डर पैदा करने के लिए निर्भया के अपराधियों को जल्दी फांसी पर लटकाया जाना चाहिए। -चेतना।
बेटी के साथ बेटे को भी समझाने की जरूरत
सबसे पहले हमें यह समझने की जरूरत है कि आखिर हमारे देश में महिलाओं के साथ ऐसे जघन्य अपराध क्यों होते हैं। लोगों को घर से बाहर निकलते समय बेटी को ही नहीं बेटे को भी समझाने की जरूरत है। देखने का नजरिया बदलें, नैतिकता का पाठ पढ़ाएं। अपराध नहीं होंगे।- प्रेमा सुतेड़ी।
अपराधियों में कानून का डर होना चाहिए
निर्भया के दोषियों को शीघ्र सजा दी जानी चाहिए। यदि अपराधी बार-बार सजा से बचने लगे तो अपराधियों में कानून का डर नहीं रहेगा। निर्भया के चारों दोषियों को शीघ्र फांसी पर लटकाया जाना चाहिए। सजा से अपराधियों में डर होगा और इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगेगा। -राधा मेहता।
बचने नहीं चाहिए निर्भया के गुनहगार
निर्भया के गुनहगार बचने नहीं चाहिए। जो अपराध उन्होंने किया है उनकी सजा केवल फांसी है। दोषियों को शीघ्र से शीघ्र फांसी पर लटकाया जाना चाहिए। साथ ही देश में ऐसा कानून बनाने की जरूरत है, जो अपराधियों में भय पैदा करे और अपराध करने से पहले सौ बार सोचे। - हेमा थलाल,तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित।
फांसी से अपराधियों में डर पैदा होगा
महिलाओं के साथ आए दिन दुष्कर्म और छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं। इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कानून बने। निर्भया के दोषियों को शीघ्र फांसी की सजा दी जानी चाहिए ताकि समाज में जिस तरह की घटनाएं हो रहीं हैं, उससे अपराधी प्रवृति के लोग भयभीत हों। - रूक्मणी जोशी, जिला पंचायत सदस्य। फोटो 05पीटीएच 27पी,
गुनहगारों को जेल में पालने की जरूरत नहीं
इस तरह की हैवानियत करने वाले अपराधियों को शीघ्र सजा सुनाकर फांसी पर लटकाया जाना चाहिए ताकि लचीले कानून का दोषी फायदा न उठा सकें। निर्भया के गुनहगारों को जेल में पालने की जरूरत नहीं है। निर्भया के गुनहगार दया के योग्य नहीं हैं।
,