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राजेंद्र बिष्ट को मिला जल प्रहरी सम्मान

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दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में एचजीवीएस के अध्यक्ष राजेंद्र बिष्ट को सम्मानित करते कमेटी के सद - फोटो : PITHORAGARH
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गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पिछले 30 वर्षों से कार्यरत हिमालयन ग्राम विकास समिति (एचजीवीएस) के अध्यक्ष राजेंद्र बिष्ट को राष्ट्रीय जल प्रहरी सम्मान से नवाजा गया है। उन्होंने 75 गांवों में अभिनव प्रयोग कर जल प्रबंधन के लिए कार्य किया। उनका चयन भारत सरकार की गठित समिति के सदस्य मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई, सांसद मनोज तिवारी, जल पुरुष राजेंद्र सिंह और अमेया साठे ने किया।
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जलशक्ति मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में राजेंद्र सिंह बिष्ट को सम्मानित किया गया। एचजीवीएस संस्थान ने सीमांत क्षेत्रों में जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए लगातार कार्य किया। जल संरक्षण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग के साथ ही 75 ग्रामों में पेयजल योजनाओं का निर्माण किया। जल संरक्षण और जलस्रोतों के भूजल को बढ़ाने के लिए कई अभिनव प्रयोग कर जन सहभागिता से सफलता प्राप्त की। इसके चलते लोग अपने गांव की योजनाओं का पिछले 20 वर्षों से स्वयं रखरखाव कर रहे हैं। पांच ग्रामों की गंभीर जल समस्या का समाधान वर्षा जल संग्रहण से किया गया। पिथौरागढ़ थल केदार मंदिर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से पेयजल समस्या का समाधान किया है।
30 ग्राम पंचायतों में तैयार किए वाटर एटलस
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। एचजीवीएस ने 30 ग्राम पंचायतों के सभी जलस्रोतों का चिह्नीकरण कर वाटर एटलस तैयार करवाए। संस्था की ओर से नाग गांव में बनाए चार लाख लीटर के वर्षाजल स्टोरेज टैंक, ग्राम झलतोला में एक करोड़ लीटर की झील पंचायतों और संस्थाओं के लिए एक मॉडल है। राजेंद्र ने संस्था के माध्यम से पिछले 30 वर्षों से लोगों को वनों और जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया है। संस्था के कार्यों को देखने के लिए देश के अन्य राज्यों के लोग यहां आते हैं।
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