फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pithoragarh: मत्स्यपालन और कीवी उत्पादन से अच्छा मुनाफा कमा रहीं मेलडुंगरी की रेखा

Wed, 03 Feb 2021 04:56 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
विज्ञापन
कीवी - फोटो : Pixabay
विज्ञापन

उत्तराखंड में सीमांत जिले पिथौरागढ़ से करीब 30 किमी दूर मेलडुंगरी गांव की रेखा जोशी स्वरोजगार के जरिये अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। इसके अलावा वह दूसरों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। रेखा पढ़ाई और नौकरी के साथ मत्स्यपालन, कीवी, मशरूम उत्पादन कर रही हैं। उन्होंने गांव में छोटी सी दुकान और चक्की उद्योग भी लगाया है।

विज्ञापन


रेखा और उनके पति गोविंद बल्लभ जोशी दो तालाब बनवाकर पिछले छह साल से मछली उत्पादन कर रहे हैं। वह बागवानी और सब्जी उत्पादन भी कर रही हैं। रेखा इस उद्यम के साथ पढ़ाई, आशा कार्यकर्ता की नौकरी और दो बच्चों की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। पिता जालंधर में रेलवे में तैनात थे, लिहाजा रेखा भी पिता के साथ वहीं रहीं। 21 साल पहले उनकी शादी मेलडुंगरी निवासी गोविंद के साथ हुई और कुछ साल बाद दोनों गांव लौट आए।

शुरुआत में तमाम दिक्कतों का सामना करके दोनों ने गांव में सिलाई का काम शुरू किया। धीरे-धीरे बागवानी, सब्जी उत्पादन किया। अच्छा मुनाफा होने पर उन्होंने काम का दायरा बढ़ाया और माल्टा, नींबू, संतरा और कीवी का उत्पादन भी शुरू कर दिया। कीवी और सब्जी उत्पादन से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने गांव में ही दो मत्स्य तालाब बनाकर गोल्डन फिश का उत्पादन शुरू किया है। मत्स्य उत्पादन से वे हर साल 50 हजार रुपये तक कमा रहीं हैं।
विज्ञापन


आटा चक्की उद्योग भी लगाया
महिला उद्यमी रेखा ने गांव में आटा चक्की लगाकर परचून की दुकान भी खोली है। पति गोविंद, बच्चों के हरसंभव सहयोग से वह अच्छा लाभ कमा रही हैं। गोविंद ने बताया कि बचपन में उनके माता-पिता गुजर गए थे। उनको पढ़ने का काफी शौक था लेकिन विषम परिस्थितियों के कारण वह नहीं पढ़ पाए। अब वह पत्नी और बच्चों को पढ़ाकर अपना सपना साकार करना चाहते हैं।

नौकरी के साथ पढ़ाई भी कर रहीं रेखा
रेखा ने बताया कि शादी के समय वह हाईस्कूल पास थी। पति के साथ जालंधर से गांव आ गईं। गांव के माहौल को समझने में उन्हें कुछ समय लगा। कुछ समय बीतने के बाद पति से पढ़ाई की इच्छा जताई तो पति ने इंटरमीडिएट परीक्षा का आवेदन पत्र भरवा दिया। इसमें वह अच्छे नंबरों के साथ पास हो गईं। इसके बाद उन्होंने एलएसएम महाविद्यालय से बीए किया। अब एमए समाजशास्त्र अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। रेखा अब आशा कार्यकर्ता और पढ़ाई के साथ ही उद्यम भी कर रही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें