प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अक्तूबर को उत्तराखंड की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने अपने मन की बात भी साझा की। उन्होंने देव डांगरों से कहा, ‘मेरे मन में यहां स्थित शिव-पार्वती मंदिर को भव्य बनाने की योजना है।’
भगवान शिव के प्राचीन स्थल पंच कैलाशों में एक आदि कैलाश की भव्यता के दर्शन करने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देव डांगरों से कहा, ‘मेरे मन में यहां स्थित शिव-पार्वती मंदिर को भव्य बनाने की योजना है।’ प्रधानमंत्री के इस कथन से उम्मीद जगी है कि आदि कैलाश में भगवान शिव का भव्य मंदिर बनेगा। केदारनाथ धाम की तरह यहां भी धार्मिक पर्यटन को परवाज मिलेगी तथा व्यास घाटी का यह क्षेत्र विश्वस्तर पर जाना जाएगा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने चीन सीमा के निकट स्थित आदि कैलाश पहुंचकर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की है। इस अवसर पर उन्होंने शिव मंदिर की दान पेटी में धनराशि डाली और पांच देव डांगरों रमेश सिंह कुटियाल, गोपाल सिंह कुटियाल, चैत सिंह कुटियाल, हरीश सिंह कुटियाल और बीरेंद्र सिंह कुटियाल को लिफाफों में दक्षिणा दी। पांचों देव डांगरों ने जब प्रधानमंत्री को क्षेत्र के विकास के लिए भोज पत्र पर लिखा ज्ञापन सौंपा तो पीएम ने कहा कि उनके मन में शिव-पार्वती मंदिर को भव्य बनाने की योजना है। प्रधानमंत्री की बात से पांचों देव डांगर काफी खुश हैं।
आदि कैलाश को बनाएं पांचवां धाम
देव डांगरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपे भोज पत्र में व्यास घाटी के विकास की मांग की। इसमें मुख्य रूप से आदि कैलाश को पांचवें धाम के रूप में विकसित करने, व्यास घाटी में बिजली, संचार, सीवरेज की सुविधा देने, गांव की चारागाह वाली भूमि पर सहमति से ही सैन्य निर्माण करने, गांव की बंजर भूमि आबाद करने के लिए युवाओं को सब्सिडी पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराने की मांगें प्रमुख हैं।
ये हैं पिथौरागढ़ के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल
आदि कैलाश, पार्वती कुंड, ओम पर्वत, कालापानी (काली नदी का उद्गम स्थल) व्यास गुफा, सीमांत का पहला गांव कुटी, खलियाटॉप, पंचाचूली, नंदा देवी बेस कैंप, चीन सीमा से लगा मिलम गांव सहित कई अन्य क्षेत्र।