पिथौरागढ़। सीमांत जिले में भी करीब 200 प्रजातियों की रंगीन तितलियों का संसार बसता है। रविवार को वर्ल्ड बटरफ्लाई डे मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य तितलियों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास को बचाने और लोगों को इन सुंदर जीवों के महत्व के प्रति जागरूक करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार पिथौरागढ़ क्षेत्र में लगभग 200 प्रजातियों की तितलियां पाई जाती हैं जो यहां की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती हैं। यहां भारत की राष्ट्रीय तितली ऑरेंज ओक्लीफ, उत्तराखंड की राज्य तितली कॉमन पीकॉक और देश की सबसे बड़ी समझे जाने वाली तितली गोल्डन बर्डविंग भी देखी गई है।
तितलियों पर 12 वर्ष से काम कर रहे विंग्स फाउंडेशन के निदेशक जगदीश भट्ट ने बताया कि ये परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये पर्यावरण की सेहत का भी संकेत देती हैं। इसलिए उनका संरक्षण प्रकृति के संतुलन के लिए आवश्यक है। सीमांत जिले में पिछले काफी समय से स्कूली बच्चों को तितलियों के संरक्षण और उनके बारे में जानकारी दी जाती है। भट्ट ने बताया कि वन विभाग के सहयोग से अप्रैल में बटरफ्लाई काउंट सीजन 10 की शुरुआत भी की जाएगी। इसके जरिये क्षेत्र में पाई जाने वाली तितलियों की प्रजातियों की गणना और उनके संरक्षण के लिए जनजागरूकता बढ़ाने का कार्य किया जाएगा।
तितलियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना जरूरी
विंग्स फाउंडेशन और वन विभाग की ओर से विद्यालयों में बच्चों को तितलियों के जीवन चक्र, उनके प्राकृतिक आवास और पर्यावरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जानकारी दी जा रही है। बच्चों को बताया जा रहा है कि तितलियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है। लोगों को अपने घरों और बगीचों में तितलियों के लिए उपयुक्त पौधे लगाने चाहिए ताकि उन्हें भोजन और सुरक्षित वातावरण मिल सके।