पिथौरागढ़। पहले से ही चिकित्सकों की कमी का सामना कर रहे स्वास्थ्य विभाग के साथ ही सीमांत जिले के लोगों की दिक्कत बढ़ गई है। चिकित्सकों के 70 पद पहले से ही रिक्त हैं। 14 चिकित्सकों का बगैर प्रतिस्थानी स्थानांतरण करने से अस्पताल खाली हो गए हैं और व्यवस्थाएं बिगड़ गई हैं। चिकित्सकों का स्थानांतरण तो कर दिया लेकिन उनकी जगह एक भी प्रतिस्थानी की तैनाती नहीं हुई है।
जिले में संचालित जिला, महिला, संयुक्त चिकित्सालय धारचूला, सीएचसी डीडीहाट, मुनस्यारी, बेरीनाग, गंगोलीहाट सहित अन्य अस्पतालों में चिकित्सकों के 174 पद स्वीकृत हैं। पहले से ही 70 पद रिक्त हैं। कुछ दिन पूर्व तीन चिकित्सकों का स्थानांतरण हुआ। अब फिर से बगैर प्रतिस्थानी के ही 11 चिकित्सकों का दूसरे जिले में स्थानांतरण कर दिया गया है और उनकी जगह एक भी प्रतिस्थानी नहीं मिला। अब जिले में चिकित्सकों के रिक्त पदों की संख्या 84 हो गई है और अस्पताल खाली हो गए हैं। स्थानांतरण होते ही संबंधित चिकित्सकों ने सेवा छोड़ दी है और उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
जिला चिकित्सालय के चिकित्सा प्रबंधन समिति के सदस्य महेश चंद्र मखौलिया, पवन कुमार ने डीएम को पत्र देकर बगैर प्रतिस्थानी चिकित्सकों को कार्यमुक्त न करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का बगैर प्रतिस्थानी के स्थानांतरण करने से आपदा की दृष्टि से संवदेनशील दुर्गम जिले के लोगों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ेगी। संवाद
42 चिकित्सक पीजी के लिए गए
पिथौरागढ़। जिले में 174 स्वीकृत पदों के सापेक्ष चिकित्सकों के स्थानांतरण के बाद रिक्त पदों की संख्या 84 हो गई है। वहीं 42 चिकित्सक पहले से ही पीजी के लिए जिले से बाहर हैं। ऐसे में जिले में वर्तमान में सिर्फ 48 चिकित्सक तैनात हैं। इन पर पांच लाख की आबादी के उपचार की जिम्मेदारी है।
एकमात्र ईएनटी सर्जन के तबादले से बंद हुआ नाक, कान, गले का उपचार
पिथौरागढ़। जिले की पांच लाख की आबादी की परेशानी को अनदेखा कर जिला अस्पताल में तैनात एकमात्र ईएनटी सर्जन का भी तबादला कर दिया गया है। ऐसे में अब जिले में कान, नाक और गले का उपचार पूरी तरह ठप हो गया है। ऐसे में संबंधित मरीजों को उपचार के लिए मैदानी क्षेत्रों की दौड़ लगानी पड़ेगी।
बोले लोग
आपदा की दृष्टि से दुर्गम जिले के लोगों के साथ सरकार ने धोखा किया गया है। चिकित्सकों का स्थानांतरण तो कर दिया लेकिन प्रतिस्थानी की तैनाती नहीं की गई। अस्पताल खाली हो गए हैं और सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे कर रही है।
महेंद्र लुंठी, पूर्ज दर्जा राज्य मंत्री।
बगैर प्रतिस्थानी चिकित्सकों के स्थानांतरण से सीमांत के लोगों को दिक्कत होगी। सरकार ने सीमांत के लोगों के हितों को अनदेखा किया है। यदि जल्द चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई तो आंदोलन होगा।
मनोज ओझा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता।
निश्चित तौर पर बगैर प्रतिस्थानी के चिकित्सकों के स्थानांतरण से व्यवस्था बिगड़ गई है। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील और दुर्गम जिले में चिकित्सकों की तैनाती न होने से दिक्कत होगी।
डॉ. एचएस ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।
अब मात्र एक विशेषज्ञ पर होगा हड्डी के इलाज का जिम्मा
चंपावत। जिला अस्पताल में अब हड्डी रोग संबंधी मरीजों को आसानी से इलाज नहीं मिलेगा। अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ पीएमएस डॉ. पीएस खोलिया का स्थानांतरण हल्द्वानी हो गया है। जहां पहले अस्पताल में पीएमएस के साथ ही दूसरे हड्डी रोग विशेषज्ञ मरीजों का इलाज करते थे, वहीं अब एक विशेषज्ञ पर मरीजों के इलाज का जिम्मा आ गया है।
जिला अस्पताल में पूर्व में तैनात हड्डी रोग विशेषज्ञ और पीएमएस मरीजों का इलाज करने के साथ ही ऑपरेशन भी करते थे। अब मात्र एक विशेषज्ञ डॉ. धनंजय पाठक ऑपरेशन से लेकर मरीजों की ओपीडी संभालेंगे। इधर, लोगों को उम्मीद थी कि स्थानांतरण होने पर जिले में चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरने का काम किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होने पर उनमें मायूसी है। अस्पताल में मात्र एक चिकित्सक की तैनाती हुई है और एक यहां से हल्द्वानी गए हैं।
जिला अस्पताल में पहले पीएमएस और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस खोलिया के होने से मरीजों को आसानी से इलाज मिल जाता था। अब अस्पताल में तैनात दूसरे हड्डी रोग विशेषज्ञ ही मरीजों का इलाज करेंगे। -डॉ. देवेश चौहान प्रभारी सीएमओ, चंपावत।