बेड़ीनाग (पिथौरागढ़)। पांच साल से बंद जिला मुख्यालय से वाया धरमघर-दिल्ली रूट पर संचालित बस के पहिए पांच साल बाद बमुश्किल घूमे लेकिन इसमें भी निगम ने खेल कर दिया। कागजों में बस का संचालन वाया धरमघर-दिल्ली तक हो रहा है लेकिन असल में इसके पहिए थल से आगे नहीं बढ़ रऐ हैं। ऐसे में क्षेत्र की 15,000 से अधिक आबादी बेबस है।
पिथौरागढ़ से वाया पांखू, धरमघर, दिल्ली तक संचालित रोडवेज बस को पांच साल पूर्व बंद कर दिया गया। तब डिपो ने बसों की कमी का हवाला देकर इसका संचालन रोक दिया था। अब डिपो को 28 नई बसें मिली हैं और बेड़े में इनकी संख्या 85 हो गई है।
दिल्ली रूट पर संचालित बस को थल में खड़ी कर औपचारिकता निभाई जा रही है। इससे धरमघर, कराला महर, कोटमान्या, लोहाथल, नगीलागांव , स्योली, दसौली, पांखू, डाडल, प्रेमनगर, बारड़बैंड आदि क्षेत्रों की 15 हजार से अधिक की आबादी परेशान है।
धरमघर के राज्य आंदोलनकारी राजेंद्र सिंह कार्की, गंगा सिंह पांगती, ईश्वरी दत्त जोशी, मनोहर पंचपाल, मोहन चंद्र पाठक, चंद्रशेखर पाठक आदि ने कहा कि वाया धरमघर बस का संचालन शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन होगा।
चालकों की है कमी
बेड़ीनाग। परिवहन निगम यात्रियों को राहत पहुंचाने के दावे तो कर रहा है लेकिन उसके पास चालक ही नहीं हैं। पिथौरागढ़ डिपो में अब भी 80 चालकों और 30 परिचालकों के पद रिक्त हैं। पर्याप्त चालक और परिचालक न होने से डिपो के लिए तय रूटों पर पर्याप्त बसों का संचालन करना चुनौती है। इसकी मार यात्री सह रहे हैं।
कोट -
फिलहाल धरमघर रूट पर संचालित बस को थल तक चलाया जा रहा है। बस का परमिट फिलहाल थल तक ही मिला है। उम्मीद है जल्द ही तय रूट पर बस संचालन की अनुमति मिलेगी। परमिट मिलते ही धरमघर-दिल्ली रूट पर सेवा संचालित होगी। - रवि शेखर कापड़ी, एआरएम, पिथौरागढ़ डिपो।